अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। जिले में अगर किसी तरह के संगीन मामलों में गवाही देने वाले व्यक्ति को या जिले में अपराधों पर अंकुश लगवाने में पुलिस को सूचना देने वाले मुखबिर को किसी भी व्यक्ति से किसी तरह का खतरा है तो वह इसके लिए जिला प्रशासन को सूचना देकर प्रशासन से सुरक्षा ले सकता है। इसके लिए जिला स्तर पर डीसी, एसपी और जिला न्यायवादी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है।
शनिवार को एसपी गंगाराम पूनिया ने बताया कि अक्सर गंभीर आपराधिक वारदातों को अंजाम देने वाले आरोपी कई बार इसलिए अदालतों से बरी हो जाते हैं क्योंकि वे अपने खिलाफ अदालतों में गवाही देने वाले लोगों को जान से मारने की धमकी देकर उन्हें डरा देते हैं। इसलिए उनके भय से लोग इस तरह के अपराधियों के खिलाफ चश्मदीद होते हुए भी अदालतों में गवाही नहीं देते और इसका फायदा अपराधियों को मिल जाता है। इसके अलावा जिला पुलिस अपने स्तर पर पूरे जिले में लोगों की मदद से एक नेटवर्क तैयार करती है।
इसमें पुलिस द्वारा जिले के कुछ लोगों को विश्वास में लेकर उनसे जिले में शांति व्यवस्था भंग करने वाले लोगों के बारे में जानकारी मिलती है और पुलिस इस तरह के लोगों को अपना मुखबिर मानती है। दूसरी ओर अपराधी किस्म के लोगों की नजर पुलिस के इन मुखबिरों पर ज्यादा होती है। वे इस तरह के मुखबिरों पर समय-समय पर हमले कराते रहते हैं या उन्हें डराते धमकाते रहते हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए जिला स्तर पर इस कमेटी का गठन किया गया है। इसलिए जिस व्यक्ति को किसी ने अदालत में गवाही देने की एवज में किसी तरह की धमकी या किसी तरह का प्रलोभन दिया है या किसी मुखबिर को जान से खतरा है तो इस बारे में कमेटी के सामने पेश होकर सुरक्षा मांग सकता है।