हर्बल पार्क में अल सुबह सैर करनी है तो टॉर्च लेकर जाएं
तोशाम। अल सुबह हर्बल पार्क में सैर करने के लिए लोगों को टॉर्च या मोबाइल टार्च का सहारा लेना पड़ रहा है। कभी दुधिया रोशनी में नहाने वाले सुरेंद्र सिंह मेमोरियल हर्बल पार्क में अब घोर अंधेरा छाया रहता है। पार्क की चारदीवारी पर लगी लाइटों सहित विभिन्न सुविधाएं इतिहास बन चुकी हैं। वन विभाग के उदासीन रवैये के चलते हर्बल पार्क का अस्तित्व खतरे में है। पार्क की लगातार हो रही दयनीय स्थिति का असर सुबह की सैर पर दिखने लगा है। सुबह साढ़े चार-पांच बजे हर्बल पार्क में सैर करने वालों की संख्या घटकर मुश्किल से 10-12 ही रह गई है। लोगों ने सरकार व प्रशासन से इस ओर ध्यान देकर अतिशीघ्र हालात सुधारने की मांग की है।
सीएलपी लीडर किरण चौधरी भी मामले में सरकार व वन मंत्री पर सवाल उठा चुकी हैं। उन्होंने इस पार्क को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखे जाने की भी बात पिछले दिनों बताई थी। कहने को तो यह जड़ी बूटी उद्यान है, लेकिन अब औषधियों के पौधे मुश्किल ही देखने को मिलते हैं।
एक वक्त था जब पार्क में कई तरह के औषधीय पौधे चारों ओर लगाए गए थे। मगर अब तस्वीर कुछ और ही बयां करती है। सैर सपाटे के लिए तोशाम वासियों की पहली पसंद रहा हर्बल पार्क अब वीरान सा लगता है। पंडित रामकिशन शर्मा, तेलुराम सागवनिया, धर्मपाल मिस्त्री, महेंद्र छान्या, सेठ बजरंग आदि ने बताया कि पार्क की दशा दयनीय हो चुकी है। उन्होंने बताया कि कभी पार्क में दुधिया रोशनी चमकती थी। लेकिन अब अंधेरा छाया रहता है। सुबह घूमने जाने के लिए टॉर्च का सहारा लेना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन व सरकार से पार्क की स्थिति की ओर ध्यान देकर हालात सुधारने की मांग की है।