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डर के साये में पढ़ रहे जिले के करीब 135 स्कूलों में हजारों बच्चे

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अमर उजाला ब्यूरो
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भिवानी। शहर के बिचला बाजार में करीब 100 वर्ष से भी ज्यादा पुराने खंडहर भवन में पांचवीं तक के बच्चों की कक्षाएं लग रही हैं। भवन की हालत यह है कि अनेक बार छत का मलबा टूटकर गिर चुका है। गनीमत यह है कि अभी तक कोई हादसा नहीं हुआ। शायद प्रशासन और विभाग भी किसी हादसे का इंतजार कर रहा है। ऐसा सिर्फ इस स्कूल में नहीं है बल्कि जिले के 135 स्कूलों में बच्चों के सिर पर खतरा बना हुआ है।
शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली के कारण जिले के हजारों बच्चे खंडहर भवनों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। कहने को तो शिक्षा विभाग ने इन्हें कंडम घोषित कर रखा है मगर अन्य ऑप्शन नहीं होने के कारण स्कूल स्टाफ सदस्य इन्हीं कंडम भवनों में कक्षाएं लगाने को मजबूर है। शिकायतों पर आईएएस और अन्य अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया। भवन को खतरनाक भी बताया। मगर इससे आगे कार्रवाई नहीं हो सकी। शहर की बात की जाए तो बिचला बाजार के अलावा हनुमान गेट क्षेत्र में भी एक-दो सरकारी कंडम स्कूल हैं।
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शिक्षा विभाग की ओर से जिले के पांच स्कूलों चांग का कन्या स्कूल, लोहारू का स्कूल व तीन अन्य स्कूलों को पूरी तरह कंडम घोषित किया जा चुका है। घुसकानी गांव के स्कूल का मुद्दा तो संसद में भी सांसद दुष्यंत चौटाला ने उठाया। इसके बाद आनन-फानन में स्कूल का एस्टीमेट तैयार कर मंजूरी के लिए बुलाया गया। विभाग की ओर से 135 स्कूलों के 620 कमरों को कंडम घोषित किया जा चुका है।
छात्राएं हुई चोटिल, फिर भी नहीं बदले हालात
चांग गांव के सरकारी स्कूल की हालत कुछ ज्यादा ही खस्ताहाल है। यहां पिछले पांच-छह साल से छात्राएं और स्टाफ सदस्य जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। कई बार छत का मलबा गिर चुका है। एक दफा तो तीन छात्राएं भी मलबा गिरने से चोटिल हो गई थी। चार साल पहले स्कूल को कंडम घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद व्यवस्था नहीं होने के कारण छात्राएं इस कंडम भवन में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है।
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वर्जन::::
135 स्कूलों के करीब 620 कमरों को कंडम घोषित किया हुआ है। इनके अस्टिमेट बनाकर भेजे हुए हैं। मंजूरी मिलने के बाद इनका निर्माण कार्य करवाया जाएगा। कुछ स्कूलों को पूरी तरह कंडम घोषित किया जा चुका है।
रमेश कुमार, एसडीओ, शिक्षा विभाग

फोटो 06 से 09
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