चकबंदी नहीं होने से जूई खुर्द और जुई बिचली के ग्रामीण परेशान
भिवानी। प्रत्येक गांव का रिकार्ड आनलाइन, उनकी किलाबंदी और चकबंदी के कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने के राज्य सरकार के दावों के विपरीत जिले के गांव जूई खुर्द और जूई बिचली की जमीन की चकबंदी नहीं हो पाई है। ग्रामीणों को खेतों में जाने के लिए रास्तों पर तकरार हो रही है। सरकार और प्रशासन से बार बार किलाबंदी और चकबंदी की गुहार लगाकर ग्रामीण थक चुके हैं। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। भिवानी तहसीलदार ने चकबंदी क्यों नहीं हो रही इस बारे में कोई जानकारी ना होने की बात कही है।
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चकबंदी ने खराब किया भाईचारा
जूई के ग्रामीण विजय रापड़िया, राजेंद्र गांधी, अतर सिंह लांबा, रणबीर सिंह, सुभाष शर्मा, राजबीर ङ्क्षसह, मीर सिंह, रामचंद्र सूबेदार, रामफल लांबा, जगबीर सिंह, रणबीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, ओमप्रकाश, रतनपाल, बलवान सिंह, महेंद्र सिंह, विजेंद्र सिंह, राजू शर्मा, चंचल, महेंद्र सिंह, राजेश कुमार ने बताया कि गांव में पुराने समय में दोनो गांवों की चकबंदी हुई थी।
ग्रामीणों ने बताया कि ना तो खेतों में जाने को रास्ते हैं और ना ही गांव में विकास कार्यों के लिए जमीन। गांव ने इस चकबंदी की वजह से काफी नुकसान उठाया है। जिसका खामियाजा दोनो गांवों के लोग आज भी भुगत रहे हैं।
ग्रामीणों बताया कि खेतों में जाने वाले रास्तों को लेकर आपस में हर रोज लड़ाई हो रही है। खेत की मेंढ़ और डोले पर आपस में मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। जमीन का रिकार्ड निकलवाने जाओ तो फर्द पूरे सात पीढ़ी तक की निकलवानी पड़ती है जिसमें समय के साथ साथ आर्थिक रूप से नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से दोनों गांवों में जल्द से जल्द चकबंदी करने की गुहार लगाई है।
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फीस भी जमा करा चुके हैं ग्रामीण
जूई बिचली सरपंच सोमबीर सिंह ने बताया कि चकबंदी करने के लिए जो राशि विभाग द्वारा बताई गई थी वह नंबरदार के मार्फत विभाग में जमा करवा दी गई है। पहले गांव की मुसाबी नहीं होनेे की बात कही जा रही थी लेकिन अब 1853 से लेकर अब तक की 3 मुसाबी भी भिवानी स्थित 57 नंबर कमरे में तैयार रखी है। फिर भी ना जाने किस बात की ढिलाई की जा रही है।
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