झींगा मछली पालन पर अनुदान नहीं मिलने से आहत किसानों ने जींद रैली में आत्मदाह करने की दी धमकी
नीली क्रांति ने निकाला किसानों का दम, सरकार नहीं दे रही सब्सिडी
अमर उजाला ब्यूरो
जुई (भिवानी)। झींगा मछली पालने वाले किसान 50 प्रतिशत अनुदान नहीं मिलने से निराश हैं। अनुदान नहीं मिलने से आहत जिले के कई किसानों ने 15 फरवरी को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जींद रैली में आत्मदाह का फैसला किया है। क्षेत्र के झींगा पालक किसान भगवान सिंह, रामनिवास, सोमबीर सिंह, अवन कुमार, आशू, मेहरसिंह, प्रवीन कुमार, सुनील कुमार, सचिन, जयंसिंह, ईश्वर सिंह ने आत्मदाह किए जाने की धमकी देते हुए कहा कि प्रदेश की सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि झींगा पालन पर 30 से 35 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो चुका है। सब्सिडी नहीं मिलने से उन्हें जमीन जायदाद बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। मत्सय विभाग के एसीएस की वजह से सब्सिडी नहीं मिल पा रही है। किसानों ने बताया कि सब्सिडी नहीं मिलने से आहत होकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की जींद रैली में आत्मदाह करेंगे। किसानों ने कहा कि आत्मदाह नहीं करने देने की सूरत में सल्फास भी जेब में रहेगी।
उल्लेखनीय है कि भिवानी जिले में झींगा मछली पालने वाले 125 फार्मरों के साथ-साथ प्रदेश के लगभग 2500 किसानों को सरकार की गलत नीतियों की वजह से दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। आम बजट 2018 में केंद्र सरकार ने झींगा मछली और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए प्रावधान किया है। हरियाणा सरकार ने भी झींगा मछली को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान किया था। सरकार द्वारा ग्रांट जारी करने के बाद भी सब्सिडी नहीं दी जा रही है। सरकार की फजीहत करवाने के लिए विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सब्सिडी को होल्ड कर दिया है।
यह है मामला-
प्रदेश में स्वर्ण जयंती अवसर पर सरकार द्वारा नीली क्रांति लाने के लिए अखबारों में इश्तहार जारी किए थे, जिसमें किसानों को झींगा मछली पालने पर 50 प्रतिशत अनुदान देने का आश्वासन दिया था। इस विज्ञापन से प्रभावित होकर भिवानी जिले के 125 फार्मरों के साथ साथ प्रदेश के लगभग 2500 किसानों ने झींगा मछली पालन का काम किया था। झींगा मछली पालन व्यवसाय करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 30 लाख रुपया खर्च आया। किसानों ने ब्याज पर पैसे लेकर झींगा पालन किया, लेकिन अब उत्पादन बहुत कम रहा जिससे किसानों की हालत खस्ता हो गई। किसानों ने मत्सय विभाग के पास सब्सिडी के लिए आवेदन किया। प्रदेश सरकार ने सब्सिडी के लिए 10 करोड 70 लाख रुपये जारी भी कर दिए, लेकिन मत्सय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी को होल्ड कर दिया। पिछले दो साल से किसान दर दर की ठोकरे खा रहे हैं।
झींगा पर प्रति एकड़ सरकार की लागत से ज्याद होता है खर्चा
केंद्रीय मछली अनुसंधान केंद्र लाहली के इंचार्ज डॉ. हरिकृष्णा ने बताया कि प्रदेश में झींगा पालन में प्रति हेक्टेयर लगभग 30 लाख से 35 लाख रुपये खर्च आता है, जबकि सरकार प्रति हेक्टेयर 25 लाख खर्च मानती है। उसी खर्च का आधा सब्सिडी के तौर पर किसानों को दिया जाता है। सरकार ने रिपोर्ट मांगी थी हमने प्रति हेक्टेयर लगने वाली लागत का ब्यौरा सरकार को भेज दिया है।
राजेंद्र सिंह सांगवान, डायरेक्टर, मत्सय विभाग
हमारी तरफ से सारा काम पूरा कर दिया गया है। मामला सरकार के पास विचाराधीन है। हमने फाइलें तैयार कर अतिरिक्त मुख्य सचिव के पास स्वीकृत होने के लिए भेज रखी है। वहां से आदेश मिलते ही सब्सिडी जारी कर दी जाएगी। विभाग में बजट की कोई कमी नहीं है।