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स्कूलों में जनरेटर दे दिए, डीजल का बजट नहीं

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डीजल के अभाव में शोपीस बने सरकारी स्कूलों में लगे जनरेटर
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लगभग चार साल से शिक्षा विभाग ने नहीं जारी किया डीजल का बजट
कई स्कूलों के जनरेटर पार्ट्स चोरी, जिले के विभिन्न थानों में शिकायत दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। लगभग चार सालों से डीजल के अभाव में जिले के लगभग सभी सीनियर सेकेंडरी और हाई स्कूलों में लगे जनरेटर बंद हैं। यहीं नहीं चोरों ने जनरेटर के पार्ट्स भी चुरा ले गए हैं। जिले में चोरी की दर्जनभर रिपोर्ट दर्ज है। वहीं जनरेटर नहीं चलने से कंप्यूटर, स्मार्ट क्लास रूम, एजुसेट जैसे प्रोजेक्ट भी बेपटरी हो गए हैं।
बिजली कट के बावजूद सरकारी स्कूलों में कामकाज निर्बाध रूप से चलता रहे, इसके लिए वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने तीन हजार से अधिक राज्य के मिडिल और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में जनरेट भिजवाए थे। शिक्षा विभाग के सूत्र बताते हैं कि एक जनरेट की कीमत उस समय करीब एक लाख रुपये थी। इनकी क्षमता 7.5 केवी है। शुरूआत के एक-दो साल तो जैसे-तैसे जनरेटर चले, लेकिन बाद में अलग-अलग कारणों से ज्यादातर जनरेटर बंद हो गए। शिक्षा विभाग ने जनरेटर की सुध नहीं ली तो चोर सक्रिय हो गए। जनरेटर के पार्ट्स चोरी की सैकड़ों रपट थानों में दर्ज हैं।
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पिछले लगभग चार साल से डीजल खरीदने के लिए विभाग ने राशि ही जारी नहीं की। इन हालात में अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने स्कूलों में जनरेटर चलते होंगे। भिवानी जिले में सीनियर सेकेंडरी और हाई स्कूल में करीब तीन सौ स्कूलों में जनरेटर लगाए गए थे। इस समय 90 प्रतिशत स्कूलों में जनरेटर धूल फांक रहे हैं।
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बिजली नहीं होने पर नहीं लगती कंप्यूटर क्लास
स्कूलों में जनरेटर बंद होने की वजह से शिक्षक और बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिस दिन बिजली न हो बच्चे कंप्यूटर क्लास नहीं लगती। ऑनलाइन आवेदन जैसे जरूरी काम प्रभावित होते हैं। गर्मी के मौसम में बिजली चली जाए तो बिन पंखे बच्चों का क्लास रूम में बैठना पड़ता है। जनरेटर न चलने की वजह से एजुसेट, स्मार्ट क्लास रूम भी नियमित रूप से नहीं चलता।
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जनरेटरों पर चोरों की नजर
स्कूल में लगे जनरेटरों पर चोरों की गिद्ध नजर है। पूरे प्रदेश की बात करें तो सैंकड़ों स्कूलों में जनरेटर के पार्ट्स चोरी हो गए हैं। राज्य के लगभग हर जिले के स्कूलों में जनरेटर के पार्ट्स चोरी होने की कई-कई रपट दर्ज हैं। भिवानी जिले में यह संख्या दर्जन भर है। बामला, पसोसा, उमरावत आदि गांवों के स्कूलों में जनरेटर के पार्ट्स भी चोरी हो गए हैं। स्कूलों में चौकीदार का न होना भी चोरी की बड़ी वजह है।
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पंचायत के सहयोग से चलता है जनरेटर
कुछ ऐसे स्कूल भी हैं जो अपने बूते पर जनरेटर चलाते हैं। सुई गांव के स्कूल में बजट नहीं होने के बावजूद जनरेटर चल रहा है। प्रधानाचार्य प्रीतम सिंह ने बताया कि पंचायत के सहयोग और स्कूल वेलफेयर फंड और अन्य स्त्रोत से उनके स्कूल का जनरेटर कभी नहीं बद होता। अध्यापक नेता वजीर सिंह बताते हैं कि भिवानी, रोहतक व करनाल में दो-तीन स्कूल हैं, जहां का स्टाफ आपस में पैसे एकत्र कर जनरेटर चलाते हैं।
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हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के पूर्व प्रधान और प्रेस सेक्रेटरी वजीर सिंह ने बताया कि नियमित बजट के अभाव में जनरेटर चलाना संभव ही नहीं है। पिछले चार साल से डीजल के लिए स्कूलों को कोई पैसा नहीं मिला है। इस वजह से प्रदेशभर में 95 प्रतिशत जनरेटर बंद हैं। बिजली कट जाने पर स्कूल स्टाफ और बच्चे को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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इस साल डीजल के लिए पैसा नहीं आया। जिसकी वजह से स्कूलों में जनरेटर चलाने में समस्या आ रही है। विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया है। बजट न होने के बावजूद भिवानी, सुई, बवानीखेड़ा के कुछ स्कूलों में जनरेटर चल रहे हैं।
सुरेश कुमार शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी
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बच्चों की बाइट.....
स्कूल में जनरेटर तो है, लेकिन चलता नहीं। जनरेटर नहीं चलने के कारण जब भी कंप्यूटर कक्षा होती है और बीच में बिजली चली जाती है तो कक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ती है।
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खुशबू, छात्रा
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गर्मियों में पंखे बंद हो जाते हैं जिस कारण कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो जाता है। कंप्यूटर चलाते समय लाइट चली जाती है तो क्लास बीच में खत्म कर दिया जाता है।
तरूण, छात्र
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