गांव स्तर पर समर्थन जुटाएगी नहर बचाओ संघर्ष समिति
बहल। जलघर में नहरों की बजाय पाइप लाइन से पानी डालने के लिए नहर बचाओ संघर्ष समिति लोहारू लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए गांव-गांव जाएगी। चार सितंबर से गांव स्तर पर कमेटियों का गठन किया जाएगा तथा लोगों को अभियान से जोड़ा जाएगा।
किसानों को समझाने के लिए समिति द्वारा तैयार किए गए पंपलेट में बताया गया है। पंपलेट में बताया गया है कि सरकार की नीतियों के कारण खेती घाटे का सौदा बन गई है। आमदनी घटने और लागत बढ़ने से किसानों पर कर्ज बढ़ रहा है और आत्महत्या करने वालों की संख्या बढ़ रही है। सरकार हरियावास के समीप पांच नंबर पंप हाउस से मिठी, मोरकां, मतानी तक 20 किमी लंबी लाइन में पेयजल के लिए पानी पहुंचाने का जो प्रयास कर रही है, वो किसान विरोधी है।
समिति ने तर्क दिया है कि इस प्रक्रिया से नलकूप बेकार हो जाएंगे, पीने का पानी खारा हो जाएगा, पेड़ों की अवैध कटाई होगी, पशु और पक्षियों के लिए पेयजल का संकट हो जाएगा।
समिति का कहना है कि पहले से रेगिस्तानी क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन बिगड़ने से बैरानी क्षेत्र में पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। समिति इसके विरोध में 12, 22 तथा 27 अगस्त को हरियावास में पंचायत का आयोजन कर विरोध जताया जा चुका है। लेकिन, इसके लिए लंबे संघर्ष की जरूरत को देखते हुए गांवों के लोगों की सहभागिता जरूरी है।
नहर की बजाय पाइप लाइन के जरिए पानी पहुंचाने से क्षेत्र में एक नहीं, कई तरह से नुकसान है। समिति इस मामले में सरकार के साथ आर और पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। गांवों में 11-11 सदस्यों की कमेटी बनाकर अभियान के साथ लोगों को जोड़ेंगे और किसान और पर्यावरण विरोधी योजना को लागू नहीं होने देंगे।
प्रदीप मंढोली कलां
सचिव, नहर बचाओ संघर्ष समिति, लोहारू