अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। 10 दिन बाद भी मांगे नहीं माने जाने से आहत बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बुधवार को सामूहिक मुंडन करवाया। पांच कर्मचारियों ने मुंडन करवाया। बाकी कर्मचारियों ने नारेबाजी कर रोष जताया। कर्मचारियों ने रोष सभा करने के बाद शहर के मुख्य बाजारों में जुलूस निकाला और सरकार पर वायदा खिलाफ का आरोप लगाते हुए रोष जताया।
उल्लेखनीय है कि अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारी 27 अगस्त से काम छोड़ हड़ताल पर है। करीब 560 कर्मचारियों के काम छोड़ हड़ताल करने से स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई। हड़ताल में नियमित और अनुबंध आधार पर लगे सभी कर्मचारी शामिल है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों में दो सौ के करीब सब सेंटरों पर ताले लटके हुए है तो टीबी मरीजों को दवाइयां देने, एंटी मलेरिया एक्टिविटी, गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना, टीकाकरण आदि कार्य प्रभावित हुए है। मंगलवार को अस्पताल परिसर से भी कर्मचारियों को बाहर करते हुए अस्पताल से 150 मीटर की दूरी पर धरना देने के लिए कहा गया था।
बुधवार को कर्मचारियों ने नेहरू पार्क में धरना शुरू किया। 10 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने से आहत कर्मचारियों ने सामूहिक मुंडन का निर्णय लिया। बुधवार को पांच कर्मचारियों जिला कार्यकारी प्रधान सोनू राठी, कुलदीप सिंह पूर्व जिला प्रधान, बजरंग लाल सीएचसी गोपी, पवन कुमार सीएचसी तोशाम, मनदीप सीएचसी झोझू, रोहताश स्वास्थ्य निरीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिरान ने सामूहिक मुंडन करवाया और सरकार को चेताया कि अब भी हमारी मांगे नही मानी तो अब आंदोलन और भी उग्र होगा। धरने के बाद शहर के मुख्य बाजारों में जुलूस निकाला गया। जुलूस में कर्मचारी नेहरू पार्क से हांसी गेट, नया बाजार होते हुए रोहतक गेट पहुंचे और वहां से महम गेट, पुराना बस स्टैंड, वापस हांसी गेट होते हुए धरना स्थल नेहरू पार्क में पहुंचे।
मंच संचालन करते हुए जिला सचिव नवीन जांगड़ा ने कहा कि सरकार के तानाशाही रवैये के कारण ही उनका धरना अस्पताल परिसर से हटा दिया गया। धरने की अध्यक्षता जिला कार्यकारी प्रधान सोनू राठी ने की धरने में दादरी प्रधान नफे सिंह, कुलदीप, रविश, सुनील, विनोद, रविंदर, नंदलाल, कमलेश, सुलक्षणा, सकुंतला, सुनीता, बलकेश ,सुशीला, गीता, मंजू, सुमन, उर्मिला, मनीषा, सरिता, पुष्पा, सीमा, रजनी और मधु ने कहा कि सामूहिक मुंडन के बाद भी सरकार चेत नहीं ली तो आंदोलन तेज किया जाएगा। सरकार जानबूझ कर उनकी मांगों के प्रति टालमटोल का रवैया अपना रही है। जिसको किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा और जब तक हमारी मांगे मानी नहीं जाती लगातार आंदोलन जारी रहेगा।
जिला सचिव नवीन जांगड़ा ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सारी स्वास्थ्य सेवाएं मलेरिया, डेंगू, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं का रजिस्ट्रेशन आदि गांवों में ठप है और मांगे नहीं माने जाने तक ठप रहेंगी।
ये है मुख्य मांगे
- एमपीएचई कैटेगिरी को 4200 का ग्रेड पे देना।
- एमपीएचई कैटेगिरी को टेक्निकल घोषित करना।
- आरसीएच को ड्रेस अलाउंस, अलाउंस आदि भत्ते देना शामिल है
- परियोजनाओं कर तहत लगे हुए सभी बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कर्मचारी (महिला और पुरुष) को 2 साल सेवा उपरांत रेगुलर करने की पालिसी बनाई जाए ।