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लावारिस पशुओं ने ली एक और जान

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लावारिस पशुओं ने ली बाइक पर जा रहे किसान की जान
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भिवानी। लावारिस पशुओं की वजह से एक और बदनसीब को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। बीती रात लावारिस पशुओं ने बाइक से खेत जा रहे खेतिहर किसान को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद किसान बाइक समेत गड्ढे में गिर गया और उसकी मौत हो गई। पिछले तीन महीनों में लावारिस पशुओं की वजह से चांग कसबे में मौत का यह दूसरा मामला है। लावारिस पशुओं की वजह से 12 व्यक्ति घायल हुए हैं।
रविवार शाम तकरीबन शाम सात बजे चांग के भूथलान पाना निवासी गुलाब सिंह (40) बाइक से खेतों की रखवाली के लिए घर से निकला। मिताथल रोड पर बडेसरा मोड़ के पास पहुंचते ही लावारिस पशु एकाएक बीच सड़क में आ गए। प्रत्यक्षदशियों का कहना है कि लावारिस पशुओं की चपेट में आने के बाद गुलाब सिंह बाइक समेत गड्ढे में गिर गया। आसपास खेतों में काम करने वाले किसान मौके पर पहुंचे और हादसे की सूचना पुलिस और परिजनों तक पहुंचाई।
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मृतक के चचेरे भाई पवन कुमार ने बताया कि बीती रात हादसे की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे। जब तक पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी। गुलाब सिंह की उस वक्त सांस चली रही थी। इसके बाद आन-फानन में अस्पताल के इमरजेंसी में ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने गुलाब सिंह को मृत घोषित कर दिया।
सोमवार सुबह पोस्टमार्टम कराकर शव पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। पवन ने बताया कि गुलाब सिंह के सिर में गहरी चोट लगी, संभवत: इसी वजह से उसकी मौत हुई। पवन ने प्रशासन से गुजारिश की कि मृतक गुलाब सिंह के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, इसलिए उसकी मदद होनी चाहिए।
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बढ़ता ही जा रहा है घायल और मृतकों का आंकड़ा
लावारिस पशुओं की वजह से जान गंवाने वाले और घायल होने वालों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। चांग इलाके में स्थिति ज्यादा गंभीर होती जा रही है। तीन महीनों के भीतर यह दूसरी मौत है। करीब तीन महीने पहले लावारिस पशुओं ने चांग कसबे में अनारो देवी नामक बुजुर्ग महिला को टक्कर मार दी थी। बाद में उनकी पीजीआई रोहतक में मौत हो गई थी। अब तक आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। पखवाड़ेभर पहले पंजूराम नामक बुजुर्ग व्यक्ति को सांड ने टक्कर मारी दी। कई दिन उपचार के बाद अब भी पंजूराम बिस्तर पर हैं।
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चांग इलाके में लावारिस पशुओं की भरमार
शासन और प्रशासन के तमाम प्रयास के बावजूद सड़क से लावारिस पशु कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। अकेले चांग और आसपास के गांवों में भारी तादाद में लावारिस पशु हैं। खेत-खलिहानों में यह संख्या कम नहीं है। किसानों के लिए अपनी फसल की सुरक्षा करना मुश्किल हो गया है। पिछले दो महीनों से प्रशासन ने नंदीशालाओं में बड़ी संख्या में पशुओं को रोका है, लेकिन इसके बावजूद समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से प्रशासन ने नंदीशाला बनाई है तब से लावारिस पशुओं की संख्या घटने की बजाय बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह यह है कि पड़ोसी जिलों के अलावा दूर-दराज के गांव के लोग पशुओं को शहर के आसपास छोड़कर चले जाते हैं।
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