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शिक्षा विभाग ने बंद कराया वैश्य इंटरनेशनल स्कूल

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बिना मान्यता के चल रहे वैश्य इंटरनेशनल स्कूल को शिक्षा विभाग ने कराया बंद
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भिवानी। बिना मान्यता के चल रहे वैश्य इंटरनेशनल स्कूल को शिक्षा विभाग ने वीरवार को बंद करा दिया। स्कूल बंद होने से स्कूल में पढ़ने वाले 900 से ज्यादा बच्चों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि स्कूल को दो दिन के लिए बंद किया गया। इस मसले पर शुक्रवार को प्रबंध समिति की बैठक होगी। वहीं, स्कूल बंद होने पर अभिभावकों ने स्कूल के साथ-साथ जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। उल्लेखनीय है कि नगर परिषद ने भी बिना नक्शे पास किए स्कूल की बिल्डिंग बनाए जाने पर सील करने का नोटिस दिया है।
वीरवार सुबह करीब 11 बजे जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद वैश्य स्कूल पहुंचे। अधिकारी ने प्रिसिंपल को निदेशालय के स्कूल बंद करने संबंधी आदेश के बारे में अवगत कराया और आदेश की प्रति सौंपी। स्कूल बंद करने के निर्देश की खबर के बाद चिंतित अभिभावक खबर कंफर्म करने स्कूल पहुंचे। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन से सवाल-जवाब किए। कुछ ने स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ प्रशासन को भी खरी-खोटी सुनाई।
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जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सदानंद ने बताया कि शिक्षा निदेशालय के आदेश के बाद स्कूल को बंद करने को कह दिया गया है। कल से बच्चे स्कूल नहीं आएंगे। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि स्कूल प्रबंधन ने विभाग के मुख्य सचिव को अपील की हुई है। अपील पर जो भी निर्णय होगा, बाद में उसी अनुसार कदम उठाया जाएगा। फिलहाल स्कूल को बंद करा दिया है।
इस फैसले नाराज अभिभावक संदीप सिवाच का कहना है कि स्कूल में दाखिला लेते समय हमें नहीं मालूम था कि बिल्डिंग नियम कायदों को ताक पर बनाई गई है। अगर बच्चों के भविष्य पर असर पड़ा तो स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को बाध्य होंगे।
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स्कूल प्रबंध समिति की बैठक पर टिकी निगाह
वैश्य मॉडल स्कूल प्रबंधन समिति के महासचिव पवन बुवानीवाला ने बताया कि डीईईओ ने स्कूल बंद करने को कहा है। इसके बाद बच्चों की छुट्टी कर दी गई। वर्तमान हालात के मद्देनजर स्कूल में दो दिन के अवकाश किया है। इस मसले पर शुक्रवार को स्कूल प्रबंधन की बैठक होगी, इसमें जो भी फैसला लिया जाएगा, उसी अनुसार आगे कदम उठाए जाएंगे। लेकिन, स्कूल बंद कराने बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है। बुवानीवाला ने बताया कि इन सब के बावजूद बच्चों के भविष्य पर बिलकुल भी आंच नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे, अभिभावकों को जरा भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि फरवरी 2016 में नक्शे और जून 2017 में मान्यता के लिए आवेदन किया था। लेकिन, संबंधित विभागों ने आज तक कोई उत्तर नहीं दिया। समिति के महासचिव ने बताया कि स्कूल बंद करने के फैसले के खिलाफ विभाग के मुख्य सचिव के पास अपील भी की गई है।

सभी अभिभावक इस कार्रवाई से चिंतित हैं। बच्चों का साल और भविष्य अधर में लटक गया है। ये सब विभिन्न विभागों की गलती है। क्या बिल्डिंग रातों-रात ही बन गई और दाखिले कर लिए गए। स्कूल ने भी हमारे साथ धोखाधड़ी की है।
- प्रवीण काठपाल, अभिभावक

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मेरे तीन पोता-पोती स्कूल में पढ़ते हैं। अगर स्कूल सील कर दिया तो साल के इस समय बच्चों को कौन दाखिला देगा। अधिकारियों को चाहिए कि कम से कम वार्षिक परीक्षाएं तो होने दें।
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सूरजभान, अभिभावक

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मुझे अपने बच्चे के साथ-साथ स्कूल में काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के रोजगार कि भी चिंता है। अधिकारियों को चाहिए कि सीलिंग जैसी कठोर कार्रवाई करने की बजाय स्कूल तथा विद्यार्थियों को राहत दें।
- नितिन गर्ग, अभिभावक
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