यमुनानगर में हरियाणा के शिक्षामंत्री कंवरपाल के आवास पर सोमवार को अपनी मांगों के समर्थन में पहुंची अध्यापिकाओं में से एक कला अध्यापक हाथ जोड़कर मंत्री के सामने जमीन पर बैठ गई और उनसे कहने लगीं, ‘सर हमारा कुछ कीजिए, हमारा रोजगार आपके हाथ में सुरक्षित है।’ इस पर शिक्षामंत्री कंवरपाल बोले, सभी को मंत्री ही दिखाई देता है।
जिस पर अध्यापकों ने भी जवाब दिया कि मंत्री के पास ही आएंगे, जब उन्होंने उन्हें ही वोट जो दी है। इस पर फिर मंत्री बोले, चलो ठीक है इस मामले में निदेशक से बात करता हूं। उसके बाद कला अध्यापक वापस आकर जगाधरी अनाज मंडी में धरने पर बैठ गए।
जानकारी के अनुसार कला एवं शिल्प अध्यापक नौकरी बचाने के लिए 12 दिन से अनाजमंडी में धरना दे रहे हैं। सोमवार को वे रोष मार्च निकालते हुए शिक्षामंत्री कंवरपाल से मिलने जा रहे थे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें शिक्षा मंत्री के आवास से पहले ही रोक दिया। केवल दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मिलने की अनुमति दी गई।
प्रतिनिधिमंडल जब शिक्षामंत्री से मिलने पहुंचा तो एक अध्यापिका उनके सामने हाथ जोड़कर बैठ गई और नौकरी बचाने की गुहार लगाने लगी। वह बोली, ‘अब उनके हाथ में अध्यापकों की नौकरी और जीवन है। सरकार ने खुली सुनवाई के दौरान हलफनामा देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। उनकी मांग है कि सरकार शिक्षकों के पक्ष में हलफनामा दायर करे। वे उनके पास रोजगार बचाने की फरियाद लेकर आए हैं। प्रदेश के करीब 15 हजार डिप्लोमा धारकों का भविष्य अब उनके हाथ में है।’
इस पर शिक्षामंत्री ने शिक्षकों को आश्वासन दिया कि किसी से अन्याय नहीं होगा। सरकार युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। ऐसे में किसी से रोजगार नहीं छीना जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार सभी शिक्षकों के लिए हित में ही निर्णय लेगी। शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बाद शिक्षक लौट गए और दोबारा अनाज मंडी में धरने पर बैठ गए।
नियुक्ति तक जारी रहेगा धरना
प्रदेशाध्यक्ष सचिन गर्ग ने कहा कि विश्वविद्यालय से डिप्लोमा करने के बाद वे सब वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। उनका धरना प्रदर्शन अध्यापकों की नियुक्ति तक जारी रहेगा। गर्ग ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से प्रदेश भर के 15 हजार लोगों ने डिप्लोमा किया था। जिनमें 613 मेरिट प्राप्त किए हुए हैं। जिसके आधार पर उन्होंने शिक्षा विभाग में कई साल सेवाएं भी दीं।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में सरकार के हलफनामे को अंतिम साक्ष्य मानते हुए शिक्षकों के खिलाफ फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर शिक्षकों ने पुनर्विचार याचिका लगाई। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। सचिन गर्ग ने बताया कि कोर्ट ने वर्तमान सरकार से इसमें अपना हलफनामा देने को कहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनके पक्ष में हलफनामा देती है तो उनकी नौकरी बच जाएगी।