अंबाला सिटी। शहर के प्रेममंदिर में शीलजी महाराज की पावन स्मृति में चल रहे श्रीमद्भागवत महापुराण के परायण पाठ का शनिवार को विश्राम होगा। शुक्रवार को गीता देवी महाराज ने कहा कि भगवान दीनबंधु, दयालु व कृपालु हैं। भगवान प्रेम से वश में होते हैं। प्रभु से प्रेम करते हुए जीव का मन अहम से दूर होना चाहिए। मन को ही सुमन बनाकर प्रभु के चरणों में समर्पित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कलयुग में केवल श्रीनाम संकीर्तन की प्रधानता है। जहां भगवान के भक्त मिलकर श्री हरिनाम संकीर्तन करते हैं, वहां भगवान अवश्य विराजमान रहते हैं। मंदिर के हरिओम सुरेश अरोड़ा ने कहा कि शीलजी महाराज की 12वीं पुण्य स्मृति में रखे गए भागवत पुराण के परायण पाठ का विश्राम शनिवार को होगा। इससे पूर्व श्रीरामचरितमानस और पावन अनंत अनुभव हुलास दोनों सद्ग्रंथों के पाठों का शुभारंभ होगा। 10 से 12 बजे तक संपूर्ण भगवत गीता का मूल पाठ सामूहिक रूप से किया जाएगा। तत्पश्चात महापुरुषों द्वारा सत्संग प्रवचन के कार्यक्रम सरकार द्वारा कोविड महामारी के बचाव हेतु जारी गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। रविवार को प्रात: दोनों सद्ग्रंथो के भोग डाले जाएंगे। हवन-यज्ञ व सत्संग प्रवचन और भंडारे के साथ समारोह का समापन होगा।