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जब-जब हुई धर्म की हानि तब-तब जन्में प्रभु : व्यास

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अंबाला छावनी के एकता विहार स्थित कीर्ति नगर के श्री शिव कुटीर मंदिर धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्
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अंबाला। एकता विहार स्थित कीर्ति नगर के श्री शिव कुटीर मंदिर धर्मशाला में शनिवार को श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। यह कथा मंदिर के 30वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में चल रही है। कथा व्यास ने कहा कि जब-जब धर्म पर विपत्ति आती है, तब-तब भगवान धरा पर अवतार लेकर अधर्म का नाश करते हैं। उन्होंने गजेंद्र मोक्ष, वामन अवतार और मत्स्य अवतार के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण कर वेदों की रक्षा की और जल प्रलय से संसार को बचाया। वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि हमारा सर्वस्व ईश्वर का ही है और महाराज बलि की भांति स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित कर देने से ही जीवन की मुक्ति संभव है।
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कथा के मुख्य आकर्षण के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। जैसे ही कारागार में प्रभु के प्राकट्य और नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारे गूंजे, पूरा पंडाल झूम उठा। मनमोहक झांकी के साथ भक्तों के बीच मिठाई और टॉफियां बांटी गईं। व्यास ने बताया कि भगवान का जीवन संघर्ष से शुरू हुआ, जो हमें विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने की प्रेरणा देता है। इसके बाद यज्ञ कर्ता पंडित सतीश शांडिल्य ने मुख्य यजमान विनोद अग्रवाल व संगीता अग्रवाल से विधि-विधान पूर्वक पूजा संपन्न कराई।
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