पिछले कई महीनों से किए जा रहे प्रशासनिक दावों की सच्चाई को 106 एमएम बारिश ने आइना दिखा दिया। अवैध कब्जे, नालों की सफाई न होना, ड्रेनेज सिस्टम का फेल होना, कार्रवाई सिर्फ बैठकों व दौरों तक सिमटना आदि कुछ ऐसे कारण रहे, जिसने ट्विनसिटी की जनता को बाढ़ का ट्रेलर दिखा दिया। एक दिन बीत जाने के बाद भी कई कालोनियों के हालात सामान्य नहीं हुए, जबकि लोग घरों में कैद हैं। जनता ने भी प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि यदि मंत्री की रिहायशी कालोनी नहीं बच पाई, तो फिर आम जनता का क्या होगा?
ये हैं जनता के सवाल -करोड़ों रुपये का हाउस टैक्स जमा कराया, फिर जनता के हिस्से यह हालात क्यों- अधिकारियों ने मीटिंग की और बाढ़ नियंत्रण के लिए काम करने के निर्देश दिए, फिर क्यों यह हालात बने- ट्विन सिटी में बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाने से जबरदस्त जलभराव हुआ, इसका जिम्मेदार कौन- प्रशासन ने क्षेत्र के अनुसार कर्मचारियों व अधिकारियों की ड्यूटियां लगाई, जबरदस्त जलभराव के लिए कौन जिम्मेदार है - जनता ने जनप्रतिनिधियों को चुना और उनसे उम्मीद की कि उनको समस्याओं से निजात मिलेगी, फिर भी समस्याएं जस की तस- तमाम दावों के बाद ट्विन सिटी के बड़े नालों की सफाई नहीं हो पाई, इसका जिम्मेदार कौन है- इस लापरवाही के कारण घरों में पानी घुस गया और लोगों का नुकसान हुआ, इसका जिम्मेदार कौन है- कालोनियों की सड़कें इस तरह से बनाई गई कि एक ऊंची और साथ वाली गली नीचे, जो जलभराव का कारण बनी- प्रशासन जनता पर ठीकरा फोड़ते हैं, लेकिन प्रशासन ने नियम लागू करने के लिए क्या किया
समय पर जागता प्रशासन तो न बिगड़ते हालात कैंट के रहने वाले मदन लाल शर्मा, आनंद मोहन शुक्ला, चंद्र अरोड़ा, लक्ष्यवीर, इंप्रीत सिंह, एसएस सोनी, सिटी के रहने वाले गौरव, रणधीर, सुरजीत सिंह, अशोक कुमार, बलजिंदर का कहना है कि प्रशासन बाढ़ नियंत्रण के लिए अधिकारियों को निर्देश देता है, लेकिन इसे पूरी तरह से अमलीजामा नहीं पहनाया जाता। ट्विन सिटी के बड़े नालों की सफाई पूरी तरह से नहीं हो पाती, जिसके कारण यह हालात बनते हैं। इसके अलावा कालोनियों में सड़कों का निर्माण इस तरह से किया गया है कि एक सड़क दूसरे से ऊंची है और पानी निकासी नहीं हो पाती। सबसे अहम है कि जिम्मेदारी तय न होने के कारण यह हालात बन रहे हैं।
मंत्री विज ने भाजपा वर्करों को मैदान में उताराट्विन सिटी की कालोनियों में जिस तरह से जबरदस्त जलभराव हुआ है, उसे देखते हुए मंत्री अनिल विज ने भाजपा वर्करों को लोगों की मदद के लिए मैदान में उतारा है। भाजपा की निगरानी समिति के चेयरमैन सोम चोपड़ा और भाजपा कार्यकर्ताओं ने अंबाला सदर क्षेत्र की विभिन्न कालोनियों का दौरा करके जलभराव की समस्या का निरीक्षण किया। इस अवसर पर निगम के अधिकारियों के साथ पानी निकासी में पेश आ रही दिक्कत के समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई भी करवाई गई। इस मौके पर निगम के कार्यकारी अधिकारी डा. प्रदीप कुमार सहित अन्य अधिकारी और कर्मी, भाजपा नेता जगदीश अरोड़ा, सुधीर, डिंपल, जिला मीडिया प्रभारी बलकेश वत्स आदि मौजूद रहे।
बारिश की स्थिति को लेकर पसोपेश में प्रशासनअंबाला में मंगलवार रात साढ़े आठ बजे के बाद से बुधवार तक कितनी एमएम बारिश हुई, इसके बारे में प्रशासन असमंजस में रहा। प्रशासन ने पहले करीब 98 एमएम बारिश घोषित की, लेकिन बाद में यह आंकड़ा 59 एमएम घोषित कर दिया गया। दूसरी और मौसम विभाग का कहना है कि अंबाला में मंगलवार रात्रि 8:30 बजे से लेकर 11:30 बजे तक लगभग 102 एमएम बारिश रिकार्ड की गई, जबकि बुधवार सुबह 8:30 बजे तक कुल 106 एमएम बारिश रिकार्ड हुई है।
यह बनाई है प्रशासन ने व्यवस्था - पानी निकासी के लिए पंप सैट लगाए गए- नालों और ड्रेनों में पानी निकासी की रुकावट दूर की गई- महेशनगर ड्रेन पर पानी निकासी के पंपों की संख्या बढ़ाने और बिजली के पंपों के साथ-साथ डीजल पंप लगाने की व्यवस्था- सिंचाई विभाग को निर्देश दिए कि टांगरी नदी व पड़ोसी राज्यों की सीमा पर नजर रखी जाए- स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं और फोगिंग करवाए- अंबाला शहर और सदर में जल प्रभावित क्षेत्रों में एक-एक मेगा स्वास्थ्य जांच शिविर लगवाए जाएंगे- स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो फोगिंग मशीनों से फोगिंग आरंभ करे और अतिरिक्त मशीनें खरीदे- नगर निगम शहर और सदर क्षेत्र में स्वच्छता गतिविधियों को तेज करे।
शहर पहले झेल चुका बाढ़ अंबाला दो बाद बाढ़ झेल चुका है। वर्ष 2009 में एसवाईएल नहर टूटने के कारण नग्गल एरिया बाढ़ की चपेट में आ गया था। इसके अलावा वर्ष 2004 व 2010 में अंबाला बाढ़ झेल चुका है। इन सभी स्थितियों में लोगों का करोड़ों रुपयों का नुकसान हुआ है। आज भी हालात यही है कि झमाझम बारिश के बाद कईं कालोनियों में लगभग बाढ़ जैसे हालात ही पैदा हो जाते हैं।
यह कहा लोगों ने कैंट की हाउसिंग बोर्ड कालोनी के रहने वाले मास्टर मदन लाल शर्मा, रमेश बंसल, मोची मंडी निवासी संतोष कुमार, ग्यारह क्रास रोड निवासी कर्ण मल्होत्रा, बारह क्रास रोड निवासी सुनील कुमार, सिटी के लक्ष्मी विहार निवासी ओम प्रकाश, जग्गी कालोनी निवासी जय सिंह व राजकुमार का कहना है कि ट्विनसिटी का ड्रेनेज सिस्टम ही ऐसा है कि झमाझम बारिश को नहीं झेल पाता। समय-समय पर इसे चैक ही नहीं किया जाता। तेज बारिश होते ही यह हांफ जाता है और घंटों तक पानी कालोनियों से नहीं उतरता। फिर कैसे प्रशासन दावा करता है कि बारिश के दिनों में लोगों को समस्याएं नहीं झेलनी होंगी। प्रशासनिक दावों और हकीकत में जमीन आसमान का अंतर है। अब तो प्रशासन अपनी आंखें खोले और लोगों की समस्याओं को दूर करे।
धान की फसल हुई बर्बाद बारिश के कारण किसानों की धान की फसल काफी बर्बाद हो गई है। खासकर अगेती धान की बिजाई करने वाले किसानों के लिए तो यह लगभग बर्बाद करने वाली फसल है। किसानों की मानें, तो यह बारिश उनके लिए बर्बादी लेकर आई है। पछेती धान की फसल पर भी संकट है, क्योंकि तेज बारिश और हवा के कारण यह बिछ गई है। इसकी कटाई भी जल्द शुरू होने वाली थी, लेकिन स्थिति ऐसी है कि यह कटाई अब और लेट हो गई है। खेतों में पानी खड़ा है और फसलें बिछी पड़ी हैं। किसानों में हरदेव सिंह, करनैल सिंह, रामप्रसाद, रंजीत, मुन्ना लाल, पाला राम, गोपाल सिंह, अच्छर सिंह का कहना है कि फसल काफी बर्बाद हुई है और अभी इसका आंकलन नहीं किया जा सकता है कि कितना नुकसान है। अगेती फसल की आमद मंडियों में हो चुकी है, जबकि कुछ ही किसानों ने अभी इसकी कटाई करनी है। ऐसे हालातों में धान उत्पादक किसान के लिए यह बारिश नुकसान का सौदा बनकर आई है।
जिन क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति है, उन क्षेत्रों का दौरा किया गया है। लोगों को इससे निजात दिलाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे युद्ध स्तर पर काम करें। स्वास्थ्य विभाग को फॉगिंग व स्वास्थ्य जांच के लिए मेगा कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं। इसी तरह नगर निगम को पानी निकासी के साथ-साथ पानी निकासी के लिए पंप सेट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन हर स्थिति पर नजर रखे है और लोगों को राहत पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। जल निकासी के किसी भी कार्य में लापरवाही सहन नहीं की जाएगी। यदि ऐसी कोई शिकायत पाई गई तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। -मनदीप सिंह बराड़, डीसी, अंबाला
यह एक प्राकृतिक स्थिति थी, जबकि डीसी से बात हुई है और जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकासी के लिए उचित कदम उठाने को कहा गया है। अंबाला सिटी व कैंट को बाढ़ मुक्त बनाने के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं।-रतन लाल कटारिया, सांसद, अंबाला
दो गांवों का संपर्क टूटाअंबाला। मंगलवार को आई तेज बारिश के कारण गांव करधान और ब्राह्मण माजरा के बीच संपर्क बुधवार को देर रात तक टूटा रहा। इस कारण से गांव के लोगों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ी। टांगरी में आए उफान के कारण दोनों गांवों के बीच की सड़क पर पानी भर गया। इस कारण से लोग भी दहशत में आ गए। इस पानी के कारण बुधवार देर रात तक दोनों गांवों का संपर्क टूटा रहा। इसी मार्ग से होकर ग्रामीण अंबाला कैंट आते जाते हैं। सड़क पानी भरा होने के कारण उन्हें दुखेड़ी की ओर से आना जाना पड़ा, जिसके कारण उनको लगभग बीस किलोमीटर तक का रास्ता अतिरिक्त तय करना पड़ा।उधर, नारायणगढ़ में बारिश के कारण फसलें बर्बाद हो गईं। धान उत्पादक कर्म चंद, बलविंद्र सिंह, सचिन कुमार, गुलजार सिंह, रघुबीर सिंह, कुलविंद्र सिंह, शशि सैनी आदि का कहना है कि अब बारिश की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि फसल पक कर पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। इन धान उत्पादकों का कहना है कि क्षेत्र में मंगलवार की रात हुई भारी वर्षा से उनकी धान की फसल को काफी नुक्सान हुआ है।दूसरी ओर मुलान में हुई बारिश के कारण हरिजन मोहल्ला में लोगों के घरों में पानी घुस गया। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान रामकुमार, प्रवीण कुमार, सुंदर लाल, तरसेम, जय पाल, रूलदा राम, महिंद्र पाल, शादी राम, फूलचंद, खेम चंद, कमलेश, सत्या देवी, कुसुम, उषा रानी, शंकुतला, जगपाल ने बताया कि मोहल्ले के लोग घरों में बंद हैं, जबकि यह समस्या काफी पुरानी है। प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।बराड़ा में बस स्टैंड की दीवार टूटी, घरों में घुसा पानी मुलाना। मंगलवार तेज बारिश के कारण बराड़ा बस स्टैंड की दीवार भी टूट गई। इसी कारण से पानी बस स्टैंड के आसपास की कालोनियों के घरों में घुस गया। इससे लोगों की परेशानियां बढ़ गईं। हरपाल सिंह, रामपाल, नरेश ने बताया कि भारी बारिश के कारण बस स्टैंड बराड़ा परिसर में काफी पानी एकत्रित हो गया। पानी निकासी ठीक तरह से न होने के कारण यह पानी दीवार तोड़ गया और बाहर निकल गया। दीवार टूटने के कारण यह पानी रिहायशी क्षेत्रों की ओर निकल गया और घरों में घुस गया। इस कारण से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और लोग अपने सामान को समेटने में जुटे रहे। पिछले डेढ़ दशक में अंबा ला में कईं बार बाढ़ जैसे हालात देखे - 3 अगस्त 2004 को घग्गर नदी का बांध टूट गया, इस वजह से अंबाला में भयंकर बाढ़ आई। सात युवतियों समेत दस लोगों की बाढ़ के पानी में बह जाने से मौत हुई, जबकि सैंकड़ों की तादाद में किसानों का पशुधन भी बह गया - 22 सितंबर 2008 को भारी बारिश के चलते पंजाब ने कच्ची पड़ी एसवाईएल नहर में पानी छोड़ दिया, नतीजतन एसवाईएल नहर टूट गई, जिससे अंबाला सिटी के अधिकतर इलाका जलमग्न हो गया- 6 जुलाई 2010 को अंबाला ने फिर बाढ़ झेली। इस बार टांगरी नदी अलग-अलग सत्रह जगहों से टूटी। सिटी और कैंट का तमाम हिस्सा जलमग्न हो गया। हिसार हाइवे का बहुत बड़ा हिस्सा बह गया। सेना को इस पर कृत्रिम पुल बनाना पड़ा। इस दौरान भी करीब ग्यारह लोगों की मौत हुई- दिसंबर 1999, अगस्त 2003, जुलाई 2006 में अंबाला ने बाढ़ जैसे हालात झेले। वर्ष 2006 में मारकंडा नदी, रूण नदी, बेगना के उफान ने नारायणगढ़ हलके में जमकर तबाही मचाई, मारकंडा नदी पर बना पुल ढह गया, जिसमें दो चौपहिया व एक दोपहिया वाहन भी बह गए, जिसके चलते आठ लोगों की मौत हो गई। साथ ही मारकंडा नदी पर बना काजवे भी बह गया, जबकि वर्ष 2003 में मारकंडा नदी ने मुलाना, बराड़ा हलके में तबाही मचाई। - अब 23 सितंबर 2015 में फिर से अंबाला में बाढ़ जैसे हालात बने हैं भारी बरसात में फर्नीचर हाउस की छत गिरी अंबाला सिटी। सिटी के गांव कांवला में तेज बरसात के चलते फर्नीचर हाउस की छत गिर गई। इससे फर्नीचर हाउस मालिक को काफी नुकसान हो गया है। पीड़ित गुरनाम सिंह ने बताया कि मंगलवार देर रात धीमी बारिश के बाद एकदम तेज बारिश होने लगी और एकदम से फर्नीचर हाउस की छत नीचे गिर गई। उसने आवाज सुनी तो उन्होंने वे घर से बाहर निकले। छत के नीचे रखा फर्नीचर टूट गया, जिससे उनका काफी नुकसान हुआ है। करंट से एक की मौतबारिश के दौरान कैंट के गुरु नानक नगर का रहने वाला युवक नितिन कुमार अपने दोस्त मनु के घर में बैटरी सिस्टम ठीक रहा था। घर में पानी भरा हुआ था। बैटरी उठाने के दौरान नितिन कुमार को करंट लग गया। उसको गंभीर हालत में कैंट सिविल अस्पताल लाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। गिरदावरी के लिए सीएम से करेंगे बात : विज प्रदेश के स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज ने कहा कि बारिश के कारण बर्बाद हुई फसलों की विशेष गिरदावरी कराने के लिए वे सीएम से बात करेंगे। वे बुधवार को कैंट के रेस्ट हाउस में अधिकारियों की बैठक में बोल रहे थे। भारी बारिश के कारण धान सहित अन्य फसलों को नुकसान हुआ है। इसी कारण से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। गांव शाहपुर, मछौंडा, बाड़ा सहित अन्य गांवों के किसानों ने बारिश के कारण धान की फसल बिल्कुल बर्बाद होने की समस्या रखी। स्वास्थ्य मंत्री ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह निगम के सभी 500 सफाई कर्मियों को अलग-अलग क्षेत्रों में भेजकर सफाई कराएं ताकि गंदगी के कारण बीमारी फैलने की संभावना को समाप्त किया जा सके। स्कूल करें ड्रेस कोड में बदलाव स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों में आने वाले बच्चों को पूरी बाजू की कमीज और निक्कर की बजाए पैंट इत्यादि पहन कर आने के लिए प्रेरित करें। इसके लिए यदि स्कूल के ड्रैस कोड में परिवर्तन करने की आवश्यकता है तो उसे भी कुछ समय के लिए परिवर्तित करें। डेंगू और अन्य मौसमी बीमारियों से बचाव में इससे मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग लगाएगा चिकित्सा शिविरउधर, सिविल सर्जन कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी, प्रधान चिकित्सा अधिकारी नागरिक अस्पताल अंबाला शहर एवं प्रवर चिकित्सा अधिकारी, सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र/सब डिविजनल अस्पताल की आपातकालीन बैठक स्वास्थ्य सेवायें महानिदेशक डॉ. डीपी लोचन की अध्यक्षता में की गई। बैठक में जिला अंबाला में हुई भारी वर्षा से उत्पन्न स्थिति एवं डेंगू/मलेरिया से निपटने के लिये कार्यों की रुपरेखा तैयार की गई। जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्तियों एवं हाई ग्रेड बुखार के संदिग्ध मामलों की जांच हेतु विशेष टीमों का गठन किया गया। अंबाला शहर में केपीएके स्कूल नदी मोहल्ला, बीडी फ्लोर मिल अंबाला कैंट, लिटिल एंजल स्कूल अंबाला कैंट में विशेष चिकित्सा शिविर का आयोजन करवाने के भी निर्देश दिये।