वीवीआईपी व वीआईपी कैटेगरी के करीब दस हजार नंबर राज्य सरकार वापस लेने जा रही है। सरकारी व प्राइवेट गाड़ियों पर लगे ये नंबर अब किसी दूसरी गाड़ी पर ट्रांसफर नहीं होंगे। ये ज्यादातर नंबर वीआईपी लोगों के पास हैं। इनमें कई नंबर तो डीसी व मंडल कमिश्नर की गाड़ियों से लेकर पूर्व मंत्रियों व विधायकों की गाड़ियों पर लगे हैं। सरकार ने गाड़ी मालिकों को ये नंबर सरेंडर करने के आदेश दिए हैं। फिलहाल इनकी जगह मालिकों को साधारण नंबर जारी किए जाएंगे। अंबाला में भी ऐसे गाड़ी मालिकों की बड़ी संख्या है जिनके पास दोनों कैटेगरी के नंबर हैं। सरकार के इस फरमान के बाद वाहन मालिकों में हड़कंप मचा हुआ है।
ये तीन सीरिज के नंबर हुए बंद
राज्य सरकार ने जिन तीन सीरिज के वीवीआईपी व वीआईपी नंबर बंद करने जा रही है उनमें एचआरएस, एचएनन, एचआरई व एचआरयू शामिल है। ये तीनों सीरीज 55 साल पहले शुरू हुई थी जब हरियाणा व पंजाब एक ही राज्य हुआ करता था। पंजाब से अलग होने के बाद हरियाणा में तीनों सीरिज की दोनों कैटेगरी के नंबर की गाड़ियां अभी तक सड़कों पर दौड़ रही हैं। जून-2019 से पहले ये सभी नंबर दूसरी गाड़ियों पर ट्रांसफर भी हो रहे थे। मगर अब सरकार ने तत्काल प्रभाव से सभी नंबरों को ट्रांसफर करने पर रोक लगा दी। स्टेट ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की ओर से भी इस सिलसिले में राज्य के सभी एसडीएम को एक लेटर जारी कर सभी वीवीआईपी व वीआईपी नंबरों की डिटेल मांगी गई है। लेटर में यह साफ कहा गया कि किसी भी हालत में ये नंबर किसी दूसरी गाड़ी पर ट्रांसफर न किए जाएं।
सरकार ने हमारे साथ धोखा किया है- सैनी
पूरे मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देने वाले अंबाला सिटी के कारोबारी नरेंद्र सैनी ने बताया कि मामला कोर्ट में जाने के बाद सरकार ने छह महीने पहले पुरानी सीरिज के नंबर सरेंडर के बाद उसी तरह के नई सीरिज के नंबर निशुल्क देने की बात कही थी। मगर अब सरकार अपनी बात से मुकर गई है। मेरे व परिवार के पास पुरानी सीरिज के एचएनक्स-4, एचआरई-10 व एचएनएक्स-11 तीन नंबर हैं।
मेरे परिवार के पास दो नंबर हैं- सरताज
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील सरताज सिंह ने बताया कि यह राज्य सरकार का गलत निर्णय है। हरियाणा बनने से पहले सरकार की ओर से उनके परिवार को दो नंबर जारी किए गए थे। यही नंबर पिछले 55-60 सालों से उनकी गाड़ियों पर लगते आ रहे हैं। ऐसी स्थिति में हम नंबर सरेंडर करने की बजाय सरकार के फैसले को फिर हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
नई सीरिज में 0001 की सबसे ज्यादा डिमांड
वीआईपी लोगों में गाड़ी पर वीआईपी नंबर लेने का जुनून अभी तक चरम पर है। 0001 नंबर की अभी तक सबसे ज्यादा डिमांड है। इसके लिए सरकार की ओर से पांच लाख रूपये की राशि तय की हुई है। हालांकि एक ही नंबर के ज्यादा आवेदन आने के बाद उसकी बोली लगाई जाती है। कई बार तो यह नंबर डबल कीमत में बिक जाता है। दूसरे वीआईपी नंबरों के लिए भी अभी कम से कम 50 हजार रुपये की राशि तय है। बोली होने की स्थिति में यह राशि बढ़ जाती है।
अभी वीआईपी नंबरों की रेट लिस्ट
1. 0001 - पांच लाख रुपये
2. 0007 और 0009 - डेढ़ लाख रुपये
3. 0002, 0006, 0008, 0010, 0011, 0022, 0033, 0044, 0055, 0066, 0077, 0088, 0099, 100, 786 - 75 हजार रूपये
इन नंबरों का रेट पचास हजार रुपये
5. 0111, 0222, 0333, 0444, 0555, 0666, 0777, 0888, 0999, 1000,2000,3000,4000,5000,6000,7000,8000,9000, 1111, 2222, 3333, 4444, 5555, 6666, 7777, 8888, 9999, 0012, 0021, 0023, 0032, 0034, 0043, 0045, 0054, 0056, 0065, 0067, 0076, 0078, 0087, 0089, और 0098। एक से ज्यादा आवेदन आने पर फिर इन नंबरों की बोली लगाई जाती है।
कोर्ट्स
संयुक्त पंजाब एवं हरियाणा के समय की सीरिज के जारी वीवीआईपी व वीआईपी नंबर वापिस लेने के आदेश आ चुके हैं। अब ये नंबर ट्रांसफर नहीं होंगे। इसके लिए वाहन मालिकों को कुछ समय की मोहलत दी गई है। सभी नंबर्स की डिटेल सरकार को भेजी जा रही है।
भारत भूषण कौशिक, एसडीएम, बराड़ा