संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। जन स्वास्थ्य विभाग की प्रस्तावित योजना के विरोध में चंदलाना गांव के ग्रामीणों का धरना शनिवार को नौवें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि ढांड सीवरेज प्लांट के गंदे पानी को चंदलाना गांव से होते हुए खेतों की ड्रेन में डालने की योजना तैयार की जा रही है। इसी के विरोध में ग्रामीण लगातार धरना देकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।
धरना स्थल पर ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी खासा रोष नजर आया कि जिला परिषद अध्यक्ष कर्मबीर कौल की ओर से गोद लिए गए गांव चंदलाना के लोग पिछले नौ दिनों से धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनकी समस्या सुनने के लिए अध्यक्ष धरना स्थल पर नहीं पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि वे बार-बार जिला परिषद अध्यक्ष से संपर्क कर उन्हें धरना स्थल पर आने और ग्रामीणों की समस्या सुनने की अपील कर चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्या पर कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई।
गंदे पानी को खेतों की ड्रेन में डालने की योजना पर सवाल
ग्रामीणों का मुख्य विरोध ढांड सीवरेज प्लांट के गंदे पानी को चंदलाना गांव से होते हुए खेतों की ड्रेन में डालने की प्रस्तावित योजना को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए ग्रामीणों की आपत्तियों और चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि विभाग वास्तव में इस योजना को लागू करना चाहता है तो उसे नियमों और टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित शर्तों के अनुसार पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी से काम करना चाहिए।
गोद लिया है तो सुख-दुख में भी साथ खड़े हों
धरना स्थल पर ग्रामीणों ने कहा कि किसी गांव को गोद लेने का मतलब केवल कागजों तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि गांव के विकास, समस्याओं और ग्रामीणों के सुख-दुख में शामिल होकर उनकी परेशानियों का समाधान करवाना भी जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने कहा कि जब गोद लिए गांव के लोग अपनी समस्या के लिए लगातार नौ दिनों से सड़क पर बैठे हैं और मदद के लिए पुकार रहे हैं, ऐसे समय में जिला परिषद अध्यक्ष का उनसे दूरी बनाए रखना ग्रामीणों को अखर रहा है।
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अधिकारियों को दिलाई शपथ की याद
ग्रामीणों ने जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारी पद संभालते समय अधिकारी संविधान और नियमों के अनुरूप अपने दायित्वों का निर्वहन करने की शपथ लेते हैं। अब समय आ गया है कि अधिकारी उस शपथ की भावना के अनुरूप कार्य करें और ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से समझें। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान जारी नियम व शर्तों का पूरी तरह पालन किया जाए और किसी भी स्तर पर मनमानी न हो।