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करोड़ों के घोटाले में नप के चार कर्मचारियों को ले गई विजिलेंस

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अंबाला। नगर निगम कैंट में 2014 में हुए करोड़ोें के एनडीसी घोटाले में बुधवार को विजिलेंस की टीम ने तीन अस्थायी और एक सेवानिवृत्त स्थायी कर्मचारी को काबू किया है। इसमें नगर परिषद के मौजूदा अधिशासी अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे अस्थायी कर्मचारी विक्रम, टैक्स ब्रांच में सेवारत अस्थायी कर्मचारी गौरव, अस्थायी सेवादार अमरजीत और कुछ माह पहले नगर परिषद से सेवानिवृत्त पूर्व स्थायी कर्मचारी मोहन लाल के नाम शामिल हैं। विजिलेंस की ओर से अचानक की गई कार्रवाई से नगर परिषद में हड़कंप मचा रहा। बताया गया है कि जब यह घोटाला हुआ था, तब चारों कर्मचारी अंबाला नगर निगम में सेवाएं दे रहे थे।
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विदित हो कि 2013 में सरकार ने कुछ कालोनियों को नियमित किया था। इसके बाद एनडीसी-एनओसी के नाम पर मोटी रकम लेकर सरकार द्वारा निर्धारित नियमों को ताक पर रख कर गलत कालोनियों और खसरा नंबरों की एनडीसी जारी की गई थी। इस दौरान कृष्ण कुमार यादव (ईओ) छह फरवरी 2014 से 23 जून 2014 तक अंबाला छावनी नगर निगम में सचिव के पद पर नियुक्त रहे। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने मिलीभगत से नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए गलत एनडीसी जारी की। इसमें नगर निगम छावनी के तत्कालीन क्लर्क और तीन अस्थायी कर्मचारियों के नाम शामिल पाए गए थे।
एनडीसी के आधार पर वर्ष 2014 में नियुक्त रहे छावनी के तत्कालीन नायब तहसीलदार अनिल कुमार, समालखा जिला पानीपत में नायब तहसीलदार मेवा सिंह, तत्कालीन नायब तहसीलदार छावनी (सेवानिवृत्त), छावनी तहसील के तत्कालीन रजिस्ट्री क्लर्क विक्रम दत्त, रजिस्ट्री क्लर्क रामनिवास गलत रजिस्ट्रियां करते रहे। इस संदर्भ में विजिलेंस जांच के बाद उपरोक्त आरोपियों के खिलाफ वर्ष 2018 में मामला दर्ज किया गया था। अब बताया जा रहा कि भ्रष्टाचार की आंच नगर परिषद और इसके एक अधिकारी के साथ-साथ तहसील तक पहुंचने वाली है। इसके तहत विजिलेंस की टीम पिछले कई दिनों से सक्रिय थी और बुधवार को कार्रवाई की गई।
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