कोरोना से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग और जिलावासियों के लिए राहत भरी खबर है। अब जिले में सरकारी अस्पताल में कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली के अभाव में किसी भी मरीज की सांसें नहीं उखड़ेंगी। क्योंकि जिले के इतिहास में पहली बार जिला नागरिक और 61 करोड़ की लागत से बने छावनी नागरिक अस्पताल में वेंटिलेटर की सौगात मिल गई है। हालांकि अभी इन वेंटिलेटर को इंस्टाल करने में कुछ समय जरूर लग सकता है लेकिन इतना तय है कि इस साल के भीतर जिला नागरिक और छावनी नागरिक दोनों अस्पतालों में मरीजों को यह सुविधा एकदम निशुल्क मिलनी शुरू हो जाएगी।
8 वेंटिलेटर आए , 5 चलेंगे छावनी अस्पताल में
जिले में कुल 8 वेंटिलेटर आ चुके हैं। एक वेंटिलेटर की कीमत करीब 6 लाख रुपये आंकी जा रही है हालांकि यह वेंटिलेटर गुरुग्राम से किसी सज्जन ने स्वास्थ्य विभाग को निशुल्क उपलब्ध करवाए हैं। इस तरह करीब 48 लाख रुपये के वेंटिलेटर जिले के दो नागरिक अस्पतालों में आ चुके हैं।
अब बनाए जाएंगे आईसीयू वार्ड : इन वेंटिलेटर को चलाने के लिए आईसीयू वार्ड बनाए जाएंगे। इसके लिए जमीन का चयन भी कर लिया गया है। छावनी में कैंसर अस्पताल के साथ और शहर में ट्रामा सेंटर के साथ जगह चयनित कर ली गई है। यहां पर 6-6 बेड के आईसीयू वार्ड बनाए जाएंगे। बता दें कि वेंटिलेटर को इंस्टाल करने के लिए एक-एक बेड की जरूरत भी होगी।
किन मरीजों को होगा फायदा : हादसों में गंभीर रूप से घायल ऐसे मरीज जिनकी सांसे उखड़ रही होती हैं, कोरोना के ऐसे मरीज जिन्हें आक्सीजन देने के बाद भी सांस लेने में दिक्कत हो रही होती है। ऐसे मरीजों के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। दरअसल ऐसे मरीज जोकि स्वयं सांस नहीं ले सकते उन्हें जिंदा रखने के लिए वेंटिलेटर का सहारा दिया जाता है ताकि उनका उपचार किया जा सके।
अभी कितना समय लगेगा और क्यों नहीं हुए इंस्टाल
दरअसल वेंटिलेटर को चलाने के लिए अभी अंबाला में किसी भी स्टाफ को प्रशिक्षण नहीं दिया गया। सबसे पहले इसे चलाने का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके अलावा वेंटिलेटर को रखने की व्यवस्था भी अभी नहीं है। इसी व्यवस्था के तहत आईसीयू वार्ड बनाए जाएंगे। इन दोनों प्रक्रिया को पूरा करने में अभी कम से कम दो महीने और अधिकतम छह माह तक का समय लग सकता है।
स्टाफ की कमी आ रही आड़े
अभी यह भी सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है कि इन वेंटिलेटर को चलाने के लिए किन्हें नियुक्त किया जाए। क्योंकि अंबाला में स्टाफ नर्स से लेकर लैब टेक्नीशियन तक की पहले ही कमी है। वेंटिलेटर की सुविधा शुरू होने से स्टाफ की और भी ज्यादा जरूरत होगी। वर्तमान की बात करें तो जिला नागरिक अस्पताल में 25 स्टाफ नर्स हैं जबकि जरूरत 90 की है। ऐसे में एक चौथी स्टाफ नर्स ही सेवाएं दे रही हैं। इसी तरह लैब टेक्नीशियन की कमी है। ऐसे में वेंटिलेटर को शुरू करने से पहले स्टाफ को भी पूरा करना जरूरी होगा।