संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। शहर के बहुचर्चित हत्या के प्रयास के मामले में अंबाला की अदालत ने फैसला सुनाया है, जिसमें दो आरोपियों विजय और समीर को बरी कर दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र मलिक की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष के गवाहों के मुकर जाने के कारण यह निर्णय लिया।
दरअसल 27 मार्च 2022 की शाम को फरियादी रोशन जब बाजार से घर लौट रहा था। तब आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने लोहे की रॉड और चाकू से उस पर जानलेवा हमला किया, जिससे उसके सिर पर गंभीर चोट आईं। इस मामले में पुलिस ने हत्या का प्रयास की धारा 307, धमकी की धारा समेत विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
अदालत में गवाह मुकरे : मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मुख्य शिकायतकर्ता और चश्मदीद गवाह अपने बयानों से पलट गए। शिकायतकर्ता रोशन ने अदालत में कहा कि आरोपी विजय ने उस पर कोई हमला नहीं किया, वहीं उसने अपनी शुरुआती शिकायत और अदालत में दिए बयानों में चोट के स्थानों और हथियारों के इस्तेमाल को लेकर परस्पर विरोधी बातें कहीं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे लोहे की रॉड से पीठ पर मारा गया, जबकि मेडिकल अधिकारी की रिपोर्ट में पीठ पर किसी भी चोट का जिक्र नहीं था।
मामले के कथित चश्मदीद रमेश कुमार ने भी अदालत में कहा कि उसके सामने ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ। न्यायाधीश ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। अदालत ने कहा कि केवल रॉड की बरामदगी के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब कोई स्वतंत्र गवाह न हो और मुख्य गवाह ही मुकर गए हों। साक्ष्यों में भारी विरोधाभास के चलते अदालत ने विजय और समीर को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने के आदेश दिए।