अंबाला। लाखों रुपये से खंभों की सुंदरता में चार चांद लगाने के लिए लगभग 15 लाख रुपये की लागत से लगाई तिरंगा लाइट्स या तो खराब हो चुकी हैं या फिर बंद हो गई हैं। इन लाइटों की जांच के लिए ठेकेदार की तरफ से कोई भी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ऐसे में प्रशासन के लाखों रुपये पर बर्बाद हो सकते हैं। यह हालात अंबाला छावनी के बाजारों सहित सुभाष पार्क के बाहर लगे फैंसी खंभों पर देखे जा सकते हैं। इसके अलावा इन लाइटों को खूबसूरती बढ़ाने के लिए चौक-चौराहों पर भी लगाया गया था जोकि अब बिल्कुल बंद हैं।
रखरखाव का अभाव
रखरखाव के अभाव में लाखों रुपये की लागत से लगाई तिरंगा लाइट्स अब खंभे की शोभा नहीं बढ़ा रही। जहां पहले यह लोगों में देशप्रेम की भावना को जागृत करती थीं। अब यह मात्र शोपीस बनकर रह गई हैं। हालांकि इनमें से अधिकांश के प्वाइंट्स ढीले हो गए हैं इसलिए बिजली की सप्लाई न मिलने कारण भी तिरंगा लाइट्स बंद पड़ हैं, अगर इन्हें दोबारा जांचा जाए तो इनमें से अधिकांश पूर्व की तरह जगमग हो सकती हैं। ऐसे ही हालात अंबाला-साहा हाइवे पर भी हैं। जहां तिरंगा लाइट्स के साथ-साथ डिवाइडर पर लगी स्ट्रीट लाइट्स भी बंद होने लगी हैं।
अधिकारियों का तर्क, बदल गया मौसम
जब इस संबंध में नगर परिषद के अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने चाइनिज लड़ियों का हवाला देते हुए कहा कि जिस प्रकार दीपावली में लगाई लड़ियां दो-चार दिन ही चलती हैं, वैसे ही यह तिरंगा लाइट्स भी कार्य करती हैं, इनकी भी कोई समय सीमा नहीं होती। जब त्योहार या फिर आजादी का महोत्सव आएगा तो पूर्व की तरह से तिरंगा लाइट्स जगमग करने लगेंगी, हालांकि फिर इसके लिए नए सिरे से बजट तैयार करना होगा।
वर्जन
मामला संज्ञान में आया है। संबंधित ठेकेदार को निर्देश दे दिए हैं कि जहां-जहां उसने तिरंगा लाइट्स लगाई हैं, उन्हें चैक करे। अगर कोई तकनीकी खामी है तो इसे दुरुस्त करे, अन्यथा नई तिरंगा लाइट्स लगाएं।
मंदीप सिंह, कार्यकारी अभियंता, नप सदर।