ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान इस बार भी विश्व धरोहर रेल खंड कालका-शिमला पर नए कोच की सुविधा नहीं मिल पाएगी। रेलवे की ओर से इस खंड पर चौथी बार किया गया स्वचलित हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट परीक्षण भी असफल हो गया। इस बार यूनिट का परीक्षण यात्री भार की क्षमता अनुसार किया गया था, लेकिन यूनिट कुछ दूरी पर जाकर रुक गई और इसका इंजन गर्म हो गया।
इस यूनिट में इंजन सहित तीन कोच लगाए गए हैं जोकि आधुनिक सुविधाओं से लैस शताब्दी की तर्ज पर तैयार किए गए हैं। इस बार भी परीक्षण असफल होने का कारण रेल खंड की ऊंचाई बताया गया है।
इसे लेकर एक बार फिर अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) लखनऊ के विशेषज्ञों की टीम कार्यवाही में जुट गई है जिससे मल्टीपल यूनिट की खामियों को दूर करके इसका दोबारा से परीक्षण किया जा सके। दरअसल, रेलवे ने नैरोगेज पर चलने वाली ट्रेनों के स्वरूप में बदलाव को लेकर योजना तैयार की थी जिससे विश्वधरोहर रेल खंडों की खूबसूरती बढ़ सके और सैलानियों को भी सुविधाओं से सुसज्जित ट्रेनों में सफर करने का मौका मिल सके।
इसलिए रेलवे ने इंजन सहित दो कोच की इस विशेष यूनिट को तैयार किया था जोकि देखने मात्र से ही शताब्दी ट्रेन का एहसास दिलाती है। हालांकि दूसरी तरफ रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला में भी पैनोरमिक कोच तैयार किए गए हैं जोकि लाल रंग के हैं और ये कोच पुराने इंजनों के साथ चलने में सक्षम है।
फरवरी में हुआ था पहला ट्रायल
स्वचलित मल्टीपल हाइड्रोलिक यूनिट का पहला परीक्षण 18 दिसंबर को किया गया था जोकि कालका से धर्मपर के बीच में था और यह सफल रहा था। इसके बाद अगला परीक्षण 19 दिसंबर को धर्मपुर से सोलन के बीच और तीसरा परीक्षण 20 दिसंबर को कालका से शिमला तक किया गया था जोकि पूर्ण तरह से सफल रहा था। हालांकि यह परीक्षण खाली कोच के साथ किया गया था।
समय की होगी बचत
स्वचलित हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट के चलने से यात्रियों के समय की बचत होगी और वो एक घंटा पहले ही गंतव्य पर पहुंच सकेंगे क्योंकि यह यूनिटी 25 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चलने में सक्षम है जबकि मौजूदा समय में जो ट्रेनें चल रही हैं वो 20 से 22 किमी प्रतिघंटा रफ्तार से चल रही हैं। ट्रेन के तीन कोच में 61 यात्री सफर कर सकते हैं। पहले और अंतिम कोच में 19-19 और बीच वाले कोच में 23 यात्री बैठेंगे। यह कोच चेन्नई की रेल कोच फैक्ट्री में तैयार किए गए हैं।
इन कोचों को बर्फ से ढके पहाड़ों और बर्फ पर स्कीइंग के खूबसूरत दृश्यों से सजाया गया है। इसके अलावा खिड़की के नीचे रोपवे और सैलानियों की तस्वीरों को भी स्थान दिया गया है। ट्रेन सेट में सुविधाजनक सीटों के साथ वाई-फाई, एसी, हीटर, एलईडी की भी सुविधा है। तीनों कोच आपस में जुड़े हैं और इससे एक से दूसरे कोच में भी जाया जा सकता है।
अधिकारी के अनुसार
स्वचलित हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट का परीक्षण मई के तीसरे सप्ताह में किया गया था जोकि असफल रहा। भार के साथ यह यूनिट कालका-शिमला रेल खंड पर नहीं चल पाई। इसलिए अब आरडीएसओ के अधिकारी इसकी खामी को दुरुस्त करने में जुट गए हैं जिससे अगला परीक्षण बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।
-नवीन कुमर, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।