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सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग के साथ बंसत पंचमी कल

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माघ मास की शुक्ल पक्ष में बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस बार मंगलवार को शाम 5:46 मिनट तक पंचमी रहेगी और इसी दिन बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। वैसे तो पूरा दिन पूजा की जा सकती है लेकिन सबसे अच्छा समय सूर्य उदय से 12 बजकर 12 मिनट तक है। इस बार बसंत पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बन रहा है। पंडित देव मित्र पाण्डेय हरे दरवाजे वाले के अनुसार बसंत पंचमी पर भगवान विष्णु और सरस्वती जी की पूजा करने का बहुत महत्व है। इस दिन प्रात:काल स्नान के बाद पीले या सफेद वस्त्र पहन कर प्रथम श्री गणेश जी की पूजा करने के बाद विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा करें। पूजा पीली वस्तुओं से करनी करनी चाहिए जैसे पीले फूल, चावल में हल्दी मिलाकर पीला करें। पीले मीठे चावल बनाकर दूध, दही, शहद, तुलसी, पंच मेवा आदि मिलाकर इस पंचामृत से मां सरस्वती को भोग लगावें और ऊँ ऐं सरस्वत्यै नम:‘ इस मंत्र का जप करें। बीज मंत्र ऐं का ही जप करें। इस दिन विद्यार्थी को इस मंत्र का जप करना बहुत शुभदायक रहता है। देवी भागवत पुराण के अनुसार मां सरस्वती की सर्वप्रथम पूजा भगवान श्री कृष्ण ने की थी।
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राशि के अनुसार इस तरह करें पूजन
पं. वासु शास्त्री के अनुसार मेष, वृश्चिक राशि वाले मां सरस्वती को लाल फूल, लाल फल, लाल वस्त्र चढ़ायें। वृष, तुला राशि वाले सफेद फूल, सफेद फल, सफेद वस्त्र व खीर चढ़ायें। मिथुन, कन्या राशि वाले हरे या लाल वस्त्र, कच्चा केला, कच्चे अमरूद, हरी मिठाई चढ़ायें। कर्क राशि वाले सफेद फूल, सफेद फल, सफेद वस्त्र और खीर चढ़ाएं। सिंह राशि वाले लाल फूल, लाल फल, लाल वस्त्र व अनार चढ़ायें। धनु व मीन राशि वाले पीली वस्तु, पीले फूल, पीले वस्त्र केसर की खीर, पीली मिठाई चढ़ाएं। मकर, कुंभ राशि वाले को हलुवा, मिले जुले फल, भूरे रंग का वस्त्र चढ़ाएं। इन सब को चढ़ाने के बाद इस मन्त्र ऊँ ऐं सरस्वत्यै नम: का 108 बार जप करें या 9 बार सरस्वती चालीसा का पाठ करें ऐसा करने से मां सरस्वती की कृपा बनी रहेगी।
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