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Ambala News: आज आंवला नवमी पर पूजन से दूर होंगे दुख

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अंबाला। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी के रूप में मनाया जाता है। आंवला नवमी दिवाली से ठीक नौ दिनों के बाद पड़ती है। पंडित प्रवेश उनियाल ने बताया कि इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन करने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे भोजन करने से समस्त रोगों का नाश होता है और व्यक्ति निरोगी होता है। इसके साथ ही इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा कर महिलाएं संतान और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए कामना करती हैं।
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आंवले के पेड़ में होता है भगवान विष्णु और शिवजी का वास
आंवला नवमी को अक्षय नवमी भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय नवमी के दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। आंवला नवमी के दिन का पूजन करके परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। कहा जाता है की इस दिन किया हुआ दान, पूजा, व्रत आदि कार्य का कई गुना अधिक परिणाम मिलता है। साथ ही साथ व्यक्ति को सभी कष्टों से भी मुक्ति मिलती है। पदम् पुराण के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु और शिवजी का वास होता है।
आंवला नवमी का धार्मिक महत्व
पद्म पुराण के अनुसार आंवला नवमी के दिन भगवान विष्णु और शिव जी को एक साथ प्रसन्न किया जा सकता है। इस दिन दोनों देवों की एक साथ एक ही जगह पूजा की जा सकती है। इस दिन आंवला खाने से आयु बढ़ती है। इसके साथ ही कहा जाता है कि आंवले के जल से स्नान करने से दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है और धन ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। जहां आंवले का फल मौजूद होता है, वहां भगवान विष्णु, लक्ष्मी और शिव हमेशा विराजमान रहते हैं। इसलिए आंवला नवमी के दिन एक बार आंवले के पेड़ के दर्शन जरूर करें।
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