छावनी के रामबाग स्थित दशहरा मैदान में श्री राम कथा सुनाते हुए साध्वी श्रेया भारती। प्रवक्ता
अंबाला। छावनी के रामबाग स्थित दशहरा मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्री राम कथा के अंतिम रविवार को साध्वी श्रेया भारती ने रामराज्य प्रसंग का रहस्य उद्घाटन किया। उन्होंने रामराज्य की वास्तविक परिभाषा समझाते हुए कहा कि केवल भौतिक संपन्नता या ऐश्वर्य ही रामराज्य नहीं है। अगर ऐसा होता, तो लंका भी समृद्धि, धन और सुव्यवस्थित सेना में अग्रणी थी, लेकिन उसे रामराज्य नहीं कहा जा सकता। लंकावासी मानसिक स्तर पर अविकसित थे और वहां आसुरी प्रवृत्तियों, अनाचार व भ्रष्टाचार का बोलबाला था। इसके विपरीत, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का राज्य नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित था।
-
भीतर राम का प्राकट्य ही असली रामराज्य
साध्वी ने कहा कि यदि आज हम समाज में अलौकिक रामराज्य की स्थापना करना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम हमें प्रभु राम को जानना होगा और उनका प्राकट्य अपने भीतर करना होगा। प्रभु राम केवल अयोध्या के राजा नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के नियामक तत्व हैं। ऐसे ब्रह्मस्वरूप श्री राम को हमारी संकीर्ण बुद्धि या लौकिक इंद्रियों से नहीं, बल्कि केवल ब्रह्मज्ञान द्वारा ही जाना जा सकता है।
शास्त्रों के अनुसार, श्री राम हमारे हृदय में निवास करते हैं और उनका दर्शन केवल दिव्य नेत्र द्वारा ही संभव है। यह दिव्य नेत्र केवल एक पूर्ण सद्गुरु द्वारा ब्रह्मज्ञान की दीक्षा मिलने पर ही खुलता है। दीक्षा के बाद जब जिज्ञासु अपने भीतर ईश्वर के वास्तविक स्वरूप का साक्षात्कार करता है और हृदय के सिंहासन पर राम विराजमान होते हैं, तभी वास्तविक रामराज्य की शुरुआत होती है। कथा के अंत में आरती की गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। यह कथा दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान और गुरुदेव आशुतोष महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित करवाई जा रही है।
छावनी के रामबाग स्थित दशहरा मैदान में श्री राम कथा सुनाते हुए साध्वी श्रेया भारती। प्रवक्ता
छावनी के रामबाग स्थित दशहरा मैदान में श्री राम कथा सुनाते हुए साध्वी श्रेया भारती। प्रवक्ता
छावनी के रामबाग स्थित दशहरा मैदान में श्री राम कथा सुनाते हुए साध्वी श्रेया भारती। प्रवक्ता