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Ambala News: तीन दशक से आचार सेवा, दंपति का पद्म अवार्ड के लिए आवेदन

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तोपखाना निवासी मनोहर लाल व शोभा आचार तैयार करती हुई: संवाद
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अंबाला। सेवा व मानवता की मिसाल बने तोपखाना निवासी 69 वर्षीय मनोहर लाल व लकवा ग्रस्त शोभा देवी की निशुल्क आचार की सेवा 30 साल बाद आज भी जारी है। मनोहर अपनी बुढ़ापा व लकवा ग्रस्त शोभा अपनी दिव्यांगता पेंशन के जरिए मंदिरों व गुरुद्वारों में अपने हाथों से बनाए गए आचार की सेवा जारी रखे हुए हैं।
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दंपती ने 20 जून 2024 को देश से सबसे बड़े पुरस्कार पद्म श्री व भूषण के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था जो स्वीकार हो गया है। अब इस पुरस्कार की गठित कमेटी इसका निर्णय लेगी। इससे पहले भी दंपती को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड से 2019 में पुरस्कार मिल चुका है।
इसके अलावा कई बड़े पुरस्कार मिल चुके हैं। यह दंपती सर्दी में आंवला, गोभी, मूली, गाजर, शलगम और गर्मियों में नींबू, आम व मिर्च का आचार तैयार करते हैं। इसके अलावा आंवले व नींबू की चटनी भी तैयार की जाती है।
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एक हाथ से बनातीं हैं आचार

मनोहर लाल ने बताया कि वह एडीसी कार्यालय में क्लर्क पद से रिटायर्ड है। पत्नी 57 वर्षीय शोभा देवी संग मिलकर यह सेवा करते आ रहे हैं। सेवा के दौरान 2017 में शोभा देवी अचानक लकवा ग्रस्त हो गई थी और जुबान भी बंद हो गई थी। बावजूद इसके अपनी सेवा नहीं रोकी। पत्नी हाथ व एक टांग न चलने के बावजूद एक हाथ से ही आचार में अपने हाथों का स्वाद छोड़ रही हैं। उनकी तरफ से लगभग 30 सालों से अंबाला के एतिहासिक गुरुद्वारा पंजोखरा सहित अन्य मंदिरों के अलावा अमृतसर गुरुद्वारे के साथ-साथ वैष्णो देवी मंदिर कटरा में चल रहे गुलशन कुमार के भंडारे में भी आचार की निशुल्क सेवा की जाती है। हर माह कहीं न कहीं निशुल्क आचार भेजते रहते हैं।
पद्मश्री के लिए संस्था ने लिखा था पत्र

मनोहर लाल ने बताया कि बाबा बालक कमेटी तोपखाना बाजार की तरफ से एक पत्र प्रधानमंत्री के नाम लिखा गया था, जिसमें उन्होंने उन्हें निशुल्क चलाई जा रही आचार सेवा के लिए दंपती को पद्श्री व पद्म भूषण देने की गुहार लगाई थी।
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