फेसबुक लोकेशन ट्रेस कर अंबाला सीआईए-वन ने मंगलवार को पिहोवा से लापता हुए तीन दोस्तों माहिर धवन (15), लक्ष्य वर्मा (13) व भविष्य (13) को जम्मू के कटरा से ढूंढ निकाला। परिवार को उनके किडनेपिंग या बैगर गैंग (भिखारियों के गिरोह ) के हाथ लगने का शक था। 36 घंटे में सुलझी इस वारदात में नाबालिगों के फोटो व डिटेल ऑल इंडिया पुलिस ग्रुप, स्टेट व जीआरपी ग्रुपों में डाल दिए गए थे। इसी आधार पर कटरा श्राइन बोर्ड ने पहचान कर अपने पास बिठा लिया था। मामले को संगीन मानते हुए अंबाला मंडल के एडीजीपी आलोक राय ने जांच सीआइए-वन को सौंप दी।
बिना बताए घर से गए थे तीनों
जानकारी के अनुसार पिहोवा की फोर मरला कालोनी का माहिर धवन टैगोर स्कूल में दसवीं, भविष्य टैगोर बाल निकेतन की नौंवी तथा लक्ष्य वर्मा सातवीं का छात्र है। तीनों दोस्त हैं। 29 अक्टूबर की शाम तीनों बिना किसी को बताए घर से चले गए थे। देर रात तक न लौटने पर परिवार ने पिहोवा थाने में गुमशुदगी का केस दर्ज कराया। अपहरण या किसी गिरोह पर शक जताया। मामले को संगीन मानकर हरकत में आई पुलिस ने जब सीसीटीवी चैक किए तो पिहोवा से बस पकड़कर पिपली उतरे। फिर करनाल बस स्टैंड पहुंचे। उसके बाद नहीं दिखे।
ऐसे चला पुलिस सीआईए का अभियान
परिजनों से पता चला कि नाबालिगों के पास केवल जेबखर्च है, कोई मोबाइल नहीं है। तमाम सोशल मीडिया एकाउंट में तीनों की फोटो सहित डिटेल डाल दी गई। पहली बार लक्ष्य का फेसबुक लॉगिन मिला। जांच में पता चला कि परिवार के किसी सदस्य ने इसे स्वयं खोला था। यह जानकार एक बार तो पुलिस को निराशा हाथ लगी। लेकिन उसके बाद भी पुलिस ने तीनों के लॉगिन पर नजरें गड़ाए रखी। वीरवार सुबह करीब पांच बजे पुलिस को माहिर की फेसबुक एक्टिव मिली। उसकी लोकेशॅन कटरा में दिखी। टीमें निकलने ही लगी थी कि श्राईन बोर्ड के सदस्यों का पिहोवा पुलिस को फोन आया कि सोशल मीडिया पर दिखाए गए बच्चों को उन्होंने अपने पास रोक लिया है। एडीजीपी आलोक राय ने मामले की जांच अंबाला सीआईए-वन को सौंपने के बाद स्वयं पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए रखी। अलसुबह सफलता मिलने तक पल-पल की डिटेल लेते व दिशा-निर्देश देते रहे।
सोशल मीडिया से मिली कामयाबी
सीआईए-वन इंचार्ज इंस्पेक्टर केवल सिंह के अनुसार सोशल मीडिया के माध्यम से केस को सुलझाया गया है। माहिर की लॉगिन फेसबुक लोकेशन कटरा की पाई गई। सभी सोशल मीडिया ग्रुपों में डिटेल के आधार पर श्राइन बोर्ड ने तीनों को अपने पास बिठाकर बात की तो नाबालिगों नेे सच बता दिया। बच्चों के आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि उनके जाने के कारण क्या रहे।