अंबाला। रेलवे स्टेशन की सुरक्षा में कोई भी आसानी से सेंध लगा सकता है। यह कमी रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी की वजह से है जोकि दो साल का समय बीत जाने के बाद भी स्टेशन पर नहीं लग पाए। इस कारण स्टेशन पर चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। रेलवे की यह गंभीरता तब है जब छावनी से जुड़े सैनिकों के जत्थे भी यहां पर आते रहते हैं। स्टेशन पर अभी भी कुछ ऐसे संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां से चोर, झपटमार व शरारती तत्व आसानी से रेलवे परिसर में घुस जाते हैं और घटना को अंजाम देकर आराम से फरार हो जाते हैं।
हैरानी की बात है कि सीसीटीवी की यह खामी उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी है। वहीं एक अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में कैंट स्टेशन पर 97 कैमरे लगाए जाने थे। इसमें से 47 ही लगे।, लेकिन सात खराब हैं। जब दूसरे चरण के तहत रेलवे स्टेशनों की सूची आई तो उसमें से स्टेशन का नाम ही गायब कर दिया गया। हालांकि इस दौरान स्टेशन पर लगने वाले 50 कैमरे पहुंच चुके थे, जोकि दूसरी सूची में शामिल आसपास के स्टेशनों पर लगा दिए गए।
कैमरों की लोकेशन नहीं सही
वहीं जो कैमरे लगे हैं, उनकी लोकेशन भी सही नहीं है। रेलवे यार्ड की बात करें तो वहां भी आजतक कैमरे नहीं लग पाए। जबकि रेलवे यार्ड में ट्रेन के धीमा होते ही झपटमार व चोर सक्रिय हो जाते हैं और पर्स और बैग लेकर चलती ट्रेन से कूदकर फरार हो जाते हैं।
एसपी के निरीक्षण में मिली थी खामियां
पिछले दिनों एसपी रेलवे राजेश कालिया ने स्टेशन पर सुरक्षा को लेकर जांच-पड़ताल की थी तो उन्हें काफी खामियां नजर आई। इसमें सबसे बड़ी खामी सीसीटीवी को लेकर थी जोकि फोटो की गुणवत्ता में अव्वल नहीं थे।
आरपीएफ पोस्ट से चोर ले गए बाइक
रेलवे स्टेशन की सुरक्षा का आकलन इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस एजेंसी के हवाले सुरक्षा का जिम्मा है, उसकी एजेंसी की पोस्ट से चोर बाइक चोरी करके ले जाता है। वो भी आरपीएफ कर्मचारी की। इसकी किसी को भी भनक नहीं लगती।
त्योहार सिर पर, सुरक्षा चौपट
15 अक्तूबर से नवरात्र शुरू होने वाले हैं। इसके बाद दशहरा, दीपावली और छठ का पर्व आएगा। स्टेशन पर सुरक्षा की बात करते तो यूटीएस काउंटर के नजदीक एक मात्र लगेज स्केनर लगा है। जबकि स्टेशन के मुख्य गेट पर न तो कैमरे लगे हैं और न ही मेटल डिटेक्टर
स्टेशन पर 97 कैमरे लगाए जाने थे, लेकिन 47 ही लग पाए हैं। इनमें से भी सात बंद हैं। इसकी जानकारी रेल टेल को दी गई है। जबकि अन्य 50 कैमरों की जानकारी उनके पास नहीं है कि वो कब लगेंगे।
-जावेद खान, प्रभारी आरपीएफ।