दीक्षा देने वाला गुरु एक : पंडित संजीव
अंबाला। छावनी के बीसी बाजार स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र के प्रसंग ने भक्तों को भावविभोर कर दिया, वहीं तक्षक दंश के बाद राजा परीक्षित के मोक्ष प्राप्ति के साथ कथा को विश्राम दिया गया। कार्यक्रम के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया। इसके बाद विधि-विधान से हवन किया। हवन में श्रद्धालुओं ने आहुतियां डालकर विश्व शांति की कामना की। कथा व्यास पंडित संजीव शर्मा बेंजवाल ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा है। जब सुदामा अपने मित्र से मिलने द्वारका पहुंचे, तो अंतर्यामी प्रभु ने सुदामा की दीनता देख बिना मांगे ही उन्हें सब कुछ अर्पण कर दिया। इसके बाद उन्होंने जीवन में दीक्षा देने वाला गुरु एक ही होता है, लेकिन शिक्षा देने वाले अनेक गुरु हो सकते हैं। मनुष्य को प्रकृति के हर कण से सीख लेनी चाहिए, जैसे दत्तात्रेय ने अपने 24 गुरु बनाए थे। आरती के पश्चात श्रद्धालुओं को हलवा, छोले और पंजीरी का प्रसाद बांटा गया। इसके बाद भंडारे में आलू-छोले और कद्दू की सब्जी का प्रसाद श्रद्धालुओं को बांटा गया। संवाद
संगत ने किया नाम सिमरण
अंबाला। गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब में बुधवार को नाम सिमरण समागम का आयोजन किया गया। संगत ने गुरु चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरुद्वारा साहिब के मुख्यग्रंथी भाई बूटा सिंह ने संगत को गुरबाणी से जोड़ा और उन्हें वाहेगुरु नाम का सिमरण करवाया। इस मौके पर संगत में गुरु का अटूट लंगर बांटा गया। संवाद
गुरमत समागम में संगत ने नवाया शीश
अंबाला। छावनी के बब्याल स्थित गुरुद्वारा श्री अकालगढ़ साहिब में बुधवार को गुरमत समागम का आयोजन किया गया। संग्रांद के मौके पर गुरुद्वारा प्रबंधकों के सहयोग से यह आयोजन करवाया गया। इसमें दरबार साहिब श्री अमृतसर से हजूरी रागी भाई कर्मजीत सिं सहित स्थानीय हजूरी रागी भाई प्रदीप सिंह ने संगत को कथा-कीर्तन सुनाकर निहाल किया। इस मौके पर गुरु का अटूट लंगर बांटा गया। संवाद