संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी के हिल रोड स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन पर अमृतवर्षा करते हुए वृंदावन से आए श्रीराम मुदगल शास्त्री महाराज ने परम सत्य का ध्यान करने की बात कही। उन्होंने बताया कि इस दृश्यमान जगत का जन्म, पालन व संहार करने वाला है, वही परम सत्य है और परम सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं है। सत्य के साथ किया गया कर्म ही भगवान है। कथा पंडाल में महाराज का प्रो. तारा चंद गुप्ता, सभा महासचिव सुधीर विंदलस, माया राम बंसल, लक्ष्मी नारायण खन्ना, सुशील गोयल, राकेश गुप्ता, राजेश गुप्ता, अचलेश शर्मा, संजय मल्होत्रा, प्रधानाचार्य ठाकुर सिंह तथा मंदिर के पुजारियों आदि ने पुष्प हार भेंट करके अभिनंदन किया।
श्रीमद्भागवत विलक्षण ग्रंथ
श्रीमद्भागवत ऐसा विलक्षण ग्रंथ है, जिसका आज तक न तो कोई पार पा सका, न पार पा सकेगा। गहरे उतरकर इसका अध्ययन-मनन करने पर नित्य नए-नए विलक्षण भाव प्रकट होते हैं। यह कालरूपी सर्प के मुख का ग्रास होने से बचाता है। कथा विस्तार में उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत द्वारा ही भक्ति, ज्ञान व वैराग्य की प्राप्ति संभव है। श्रीमद्भागवत एक पका हुआ फल है, इस पर शुक नाम के तोते का मुख लगा है। इसलिए वो अमृत के समान है। प्रत्येक मनुष्य को भागवत रस का पान तब तक करते रहना चाहिए, जब तक शरीर में प्राणों का संचार हो रहा हो।
अंबाला छावनी के श्री सनातन धर्म मंदिर में प्रवचन करते श्रीराम मुदगल शास्त्री। प्रवक्ता
अंबाला छावनी के श्री सनातन धर्म मंदिर में प्रवचन करते श्रीराम मुदगल शास्त्री। प्रवक्ता
अंबाला छावनी के श्री सनातन धर्म मंदिर में प्रवचन करते श्रीराम मुदगल शास्त्री। प्रवक्ता