अंबाला सिटी। मानसिक रोगियों के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए कुरुक्षेत्र और यमुनानगर के मरीज भी इन दिनों प्रमाण पत्र के लिए अंबाला पहुंच रहे हैं। ऐसे में मनोरोग विशेषज्ञों के पास अतिरिक्त भार बढ़ रहा है। हर सप्ताह को देखें तो 40 से 50 मरीज सिर्फ इन दोनों जिलों के ही आते हैं। ऐसे में सिटी व छावनी के चिकित्सकों पर भी अतिरिक्त मरीजों का बोझ बढ़ता जा रहा है।
सिटी में डॉ राणा और छावनी में डॉ कुलदीप मानिसक रोगियों का उपचार करते हैं। दूसरे जिलों के मरीजों के बढ़ने से स्थानीय मरीजों के लिए समय भी कम मिल पाता है। वहीं इन दिनों मानसिक रोगियों की ओपीडी भी 120 से अधिक हो रही है।
-
मानसिक दिव्यांगता प्रमाण के लिए विशेषज्ञ अनिवार्य
मानसिक दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मरीज को मनोरोग विशेषज्ञ के समक्ष भेजा जाता है। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सक प्रतिशत के आधार पर मानसिक दिव्यांगता दर्ज करता हैं। फिर मरीज को प्रमाण पत्र मिलता है। बीते माह से यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में जिले में मनोरोग चिकित्सक नहीं है। इसलिए यह समस्या आ गई है।
छावनी में नहीं ओएसटी केंद्र
नशा छोड़ने वाले मरीजों के लिए अंबाला सिटी में तो ओएसटी केंद्र चलाया जा रहा है। मगर अभी तक इसे छावनी में शुरू नहीं किया गया है। जबकि छावनी में भी 700 से अधिक टीके से नशा करने वाले मरीज हैं। जिन्हें उपचार के लिए अंबाला सिटी आना पड़ता है। ऐसे में 90 प्रतिशत मरीज सिटी में नहीं आते। छावनी में सिर्फ ओपीडी के सहारे ही मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। जबकि यहां पर भी एक सेटेलाइट ओएसटी केंद्र खोलना चाहिए। मगर अभी तक न तो विभाग ने इस बारे में विचार किया है और न ही निदेशालय की ओर से कोई प्रपोजल आया है।
छावनी में ओएसटी बनाने के लिए अभी सरकार की कोई हिदायतें नहीं मिली है।अगर यहां पर ओएसटी केंद्र खुलेगा तो कई मरीजों को लाभ मिलेगा।
डॉ विपिन भंडारी, नोडल अधिकारी जिला मेंटल हेल्थ टीम।
यमुनानगर और कुरुक्षेत्र की ओर से सीएमओ व डीजी हेल्थ को पत्र लिखा जाता है। इसके बाद ही मंजूरी मिली है। हमारी ओर से सिर्फ दिव्यांगता प्रतिशत अंकित की जाती है। निर्देशों के आधार पर ही मरीजों को जांचा जा रहा है।
डॉ बलविंद्र कौर, डिप्टी सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग अंबाला।