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Ambala News: जांच में भारी प्रतीक्षा, मरीजों को दिया जा रहा दो-दो महीने का समय

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मीनू। - फोटो : मदीना स्थित आरकेपी विद्यालय में आयोजित ​क्विज में उप​स्थित बच्चे। स्रोत : स्कूल
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अंबाला सिटी। नागरिक अस्पताल में पांच घंटे में 150 अल्ट्रासाउंड की जांच करना स्वास्थ्य कर्मियों के लिए मुश्किल भरा साबित हो रहा है। एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन और एक ही सोनोलॉजिस्ट के सहारे चल रही यह व्यवस्था चरमरा रही है। हालात यह हैं कि एक दिन में 50 मरीजों के अल्ट्रासाउंड ही हो पा रहे हैं। अन्य मरीजों को एक से दो माह का समय दिया जा रहा है। कुछ लोग तो बीमारी को देखते हुए बाहर से ही अल्ट्रासाउंड करा ले रहे हैं। यह अव्यवस्था संसाधनों की कमी के कारण बनती दिख रही है।
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स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त संसाधन ही नहीं हैं कि वह एक दिन में आए मरीजों की जांच कर सकें, ऐसे में उन्हें मरीजों को आगे की तारीख देनी पड़ रही है। यह हालात आपातकालीन स्थिति अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे मरीज के लिए संकट खड़ा कर रहे हैं।



30 चिकित्सक हर रोज लिख रहे अल्ट्रासाउंड



सिटी के नागरिक अस्पताल में 25 से 30 चिकित्सक हैं। हर दिन की ओपीडी में जांच करने के बाद अगर सभी चिकित्सक तीन मरीजों को भी अल्ट्रासाउंड जांच कराने को लिखते हैं तो 90 मरीज हो जाते हैं। जबकि अल्ट्रासाउंड करने को पांच घंटे का समय है। प्रत्येक अल्ट्रासाउंड में मरीज की स्थिति के हिसाब से समय लगता है, ऐसे में एक दिन में तेजी से भी काम हो तो 50 मरीजों की ही जांच संभव है।
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3 मशीनें और 3 रेडियोलॉजिस्ट की जरूरत

नागरिक अस्पताल में अभी एक ही अल्ट्रासाउंड मशीन से काम चलाया जा रहा है। यहां तीन अल्ट्रासाउंड मशीनों की जरूरत है और इन्हें चलाने वाले इतने ही रेडियोलॉजिस्ट चाहिए। वर्तमान में एक सोनोलॉजिस्ट, एक स्टाफ नर्स व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत हैं। दूसरी तरफ अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं। एक मशीन एक करोड़ रुपये की आती है। ऐसे में मरीजों के दबाव को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को यहां कम से कम एक मशीन और स्टाफ की व्यवस्था करनी ही चाहिए।



आपातकालीन स्थिति में रहता है दबाव

नागरिक अस्पताल में एक्स-रे की सुविधा 24 घंटे की है। यहां पांच रेडियोग्राफर कार्यरत हैं। जबकि दोपहर दो बजे के बाद अल्ट्रासाउंड के लिए कोई गंभीर मरीज आ जाए तो ड्यूटी पूरी कर चुके सोनोलॉजिस्ट को ही आना पड़ रहा है। अगर वह अवकाश पर हों तो गर्भवतियों को एक पैनल के अस्पताल व पथरी रसौली आदि के मरीजों को 14 किलोमीटर दूर कैंट अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं।

शुक्रवार को नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचीं मीनू ने बताया कि उन्हें दो महीने के बाद का समय मिला है। कोई दो महीने तक बीमारी को साथ लेकर ही घूमता रहे, विभाग यह सोचता है।




एक दिन में 50 अल्ट्रासाउंड जांचें ही संभव हैं। इसलिए अन्य अस्पतालों की तरफ यहां मरीजों को आगे का अपॉइंटमेंट दिया जा रहा है। मशीन व रेडियोलॉजिस्ट बढ़ते हैं तो इसमें सुधार हो सकता है।
-डॉ. विजय वर्मा, सोनोलॉजिस्ट, अल्ट्रासाउंड विभाग, नागरिक अस्पताल सिटी



नागरिक अस्पताल में मरीजों की निर्भरता अधिक है। अल्ट्रासाउंड को लेकर अधिक प्रतीक्षा न करनी पड़े इसके लिए मुख्यालय में बात की जाएगी।-डॉ राकेश सहल, सीएमओ

मीनू।- फोटो : मदीना स्थित आरकेपी विद्यालय में आयोजित क्विज में उपस्थित बच्चे। स्रोत : स्कूल

मीनू।- फोटो : मदीना स्थित आरकेपी विद्यालय में आयोजित क्विज में उपस्थित बच्चे। स्रोत : स्कूल

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