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Ambala News: निजी मैदानों की भरमार, एक मैच के खिलाड़ी देते दो हजार

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विशाल - फोटो : विशाल
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अंबाला। क्रिकेट के बढ़ते क्रेज को देखते हुए जिले में मैदानों की कमी खलने लगी है। कोई भी सरकारी मैदान न होने के कारण मजदूर खिलाड़ियों को लोगों द्वारा तैयार किए गए निजी मैदानों को सहारा लेना पड़ रहा है। यहां तक कि मैच खेलने के लिए दो से छह हजार रुपये तक भी चुकाने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं अंबाला छावनी व सिटी से करीब 10-10 किलोमीटर की दूरी पर बने मैदानों में जाना पड़ता है। रविवार व छुट्टी वाले दिन तो यह स्थिति बन जाती है कि अंबाला में कुछ गांवों में बने निजी मैदान के अलावा कुछ कॉलेजों के मैदान भी भर जाते हैं। खिलाड़ियों को मजबूरन आस पास के शहरों में बने मैदानों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिले में निजी मैदानों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। जो अपने खाली प्लाटों व खेतों में यह मैदान तैयार कर रहे हैं और किराये पर देकर काम चला रहे हैं।
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एक मैदान में होते हैं अलग-अलग शिफ्टों में मैच

क्रिकेट की खुमारी इस कद्र है कि एक ही मैदान में छुट्टी वाले दिन सुबह व शाम की शिफ्ट में भी मुकाबले होते हैं। एक सप्ताह पहले ही क्रिकेट प्रेमी खेलने के लिए एडवांस पेमेंट देकर बुकिंग करवा देते हैं। जिन्हें समय नहीं मिलता है तो वो मैच खत्म होने का इंतजार करते हैं। फिर पैसे देकर मैच खेलते हैं। कुछ मैदान में टीम के हिसाब से पैसे लिए जाते हैं तो किसी मैदान में प्रत्येक खिलाड़ी के हिसाब से।

अंबाला में यहां-यहां है क्रिकेट के निजी मैदान

- अंबाला छावनी मंडोर का क्रिकेट मैदान
- गरनाला क्रिकेट मैदान
- चुडियाला के खुब्बर क्रिकेट मैदान
- इसके अलावा कुछ स्कूलों व कॉलेजों के मैदान भी किराये पर मैच खेलने के लिए दिए जा रहे हैं

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सरकारी मैदान होना चाहिए
क्रिकेट प्रेमी विक्की ने बताया कि जिले में कोई भी सरकारी मैदान नहीं बचा है जहां पर वह खेल सके। निजी मैदानों में पैसे देकर खेलना मजबूरी बन गई है। अन्य खेलों के साथ-साथ क्रिकेट को भी बढ़ावा मिलना चाहिए। सरकारी मैदान भी क्रिकेट के लिए होना चाहिए।
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मैदान खत्म होने पर छूटता जा रहा क्रिकेट
क्रिकेट प्रेमी का कहना है कि पहले दोस्तों के साथ हर सप्ताह क्रिकेट खेलते थे। जैसे-जैसे छावनी एसडी कॉलेज के सामने मिल्ट्री यानी सेना का मैदान बंद हुआ और फिर गांधी मैदान में खेलना बंद हुआ तो क्रिकेट ही छूट गया। कम से कम एक मैदान तो ऐसा होना चाहिए, जहां बिना पैसों के क्रिकेट खेला जा सके।
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सालों से कोई मैदान उपलब्ध नहीं
क्रिकेट प्रेमी विशाल ने बताया कि नशे से दूर रहने के लिए युवा खेल को अपनाते हैं लेकिन जिले में कोई क्रिकेट मैदान ही नहीं बचा है। क्रिकेट प्रेमी आखिर खेलने कहां जाए। इसलिए खेल विभाग या फिर प्रशासन को कोई मैदान उपलब्ध करवाना चाहिए। 10 साल से तो वह देख रहे हैं कि कोई इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
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विशाल- फोटो : विशाल

विशाल- फोटो : विशाल

विशाल- फोटो : विशाल

विशाल- फोटो : विशाल

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