संवाद न्यूज एजेंसी
मुलाना। पहाड़ों में हुई मूसलाधार बारिश का असर सोमवार को मुलाना क्षेत्र में साफ दिखाई दिया। मारकंडा नदी ने इस सीजन में तीसरी बार खतरे के निशान 10 फीट को पार करते हुए दोपहर करीब 2 बजे 10.9 फीट के स्तर पर 54,437 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया।
भारी उफान के चलते नदी अपने रास्ते से बाहर निकलकर खेतों में फैल गई, जिससे हेमामाजरा में फसल के खराब होने का खतरा मंडराने लगा। शाम 5 बजे तक जलस्तर घटकर 9.4 फीट लगभग 45,566 क्यूसेक पर दर्ज किया गया, लेकिन दिनभर नदी रौद्र रूप में बहती रही। वहीं, विभाग की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए रहीं और आसपास के गांवों में अलर्ट जारी कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार नदी का जलस्तर सीधे तौर पर पहाड़ों में होने वाली बारिश पर निर्भर करता है। हेमामाजरा में घुसा नदी का पानी : मारकंडा नदी के उफान का असर हेमामाजरा गांव में सबसे ज्यादा दिखा। खेतों के रास्ते बहता पानी गांव तक पहुंच गया और मुलाना-हेमामाजरा रोड व फिरनी पर तेज बहाव के साथ फैल गया। इससे स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई। यही पानी आगे बढ़ते हुए सोहाना, घेलड़ी, तंदवाल, खानपुर समेत कई गांवों की जमीनों में भी घुस गया। उधर, ब्राह्मण माजरा रोड पर भी नदी का पानी ऊपर से गुजरता देखा गया।
सिंचाई विभाग के अफसरों ने लिया जायजा : स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर एमएल राणा ने मुलाना पहुंचकर हालात का जायजा लिया। इस दौरान हेमामाजरा के ग्रामीण अशविंद्र सिंह ने उनसे गांव में बांध निर्माण की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना था कि यदि इस बार बांध बना होता तो सैकड़ों एकड़ फसलें बच सकती थीं। अफसरों ने बरसाती सीजन के बाद औपचारिकताएं पूरी कर जल्द बांध बनाने का आश्वासन दिया।