छावनी के विकासपुरी इंडस्ट्रीयल एरिया में कुंभ अभिषेक मंदिर के शिखर पर कलश बदलने जाते हुए। स्वयं
अंबाला। छावनी के विकासपुरी इंडस्टि्रयल एरिया स्थित श्री शिरडी साईं शक्ति फाउंडेशन और स्वामी सत्यानंद महाराज के सानिध्य में मंदिरों में शिखरों पर कलश और ध्वज बदले गए। इन मंदिरों में श्रीगणेश मंदिर, साईं बाबा मंदिर, शिव परिवार मंदिर, शनिदेव मंदिर और श्री राधा कृष्ण मंदिर शामिल रहे।
यह कलश जगाधरी से मंगवाए गए। इस दौरान मंदिर परिसर में सबसे पहले विधि विधान से प्राण प्रतिष्ठा पूजा की गई। मंदिरों की आत्मा को दोबारा जाग्रत करने के लिए हर 12 वर्ष बाद कुंभ अभिषेक की परंपरा निभाई जाती है। जो वैदिक अनुष्ठान, प्राण प्रतिष्ठा और शिखर कलश पूजन का समर्पित संगम है।
पंडित मातादीन गौड़ ने बताया कि शिखर, कलश और ध्वजा मंदिर की दिव्यता के प्रतीक हैं। कलश और ध्वज को शुभ और पवित्र चिह्न माना जाता है। यह मंदिर में सकारात्मक ऊर्जा और मंगलमय वातावरण का संचार करते हैं। यह मंदिर की पहचान हैं, बिना कलश और ध्वज के कोई भी मंदिर पूर्ण नहीं माना जाता। मंदिर का शिखर ऊंचा बनाया जाता है ताकि दूर से ही दर्शन कर भक्त पुण्य प्राप्त कर सकें। उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि शिखर के दर्शन मात्र से ही जीवन के पापों का क्षय होता है। जब कोई भक्त मंदिर के शिखर पर ध्वज और कलश अर्पित करता है, तो वह ईश्वर के प्रति अपनी आस्था, श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करता है।