अंबाला सिटी। टांगरी नदी की खोदाई के लिए लगाई गई निविदा खत्म भी हो गई मानसून सक्रिय हो गया पर खोदाई शुरू नहीं हो पाई। इसके लिए मानसून आने से पहले सिंचाई विभाग ने निविदा लगाई। पूरी प्रक्रिया अपनाकर ठेकेदारों को नदी की खोदाई का ठेका भी दे दिया गया।
यह भी तय हो गया कि खोदाई की मिट्टी को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की परियोजनाओं में प्रयोग किया जाएगा। यह सभी कार्य कागजों में चलते रहे और खोदाई का ठेका 30 जून को समाप्त भी हो गया। अब दोबारा ठेका लगेगा या नहीं, खोदाई होगी या नहीं, इसका किसी के पास जवाब नहीं है।
अब मानसून के तीन महीने गुजरने तक तो नदी की खोदाई हो भी नहीं सकती है। ऐसा तब है जबकि फरवरी में सीएम ने सिंचाई विभाग, खनन विभाग सहित अन्य विभागों की उच्चस्तरीय बैठक ली थी और विभाग को जल्द से जल्द टेंडर लगाकर नदियों की खोदाई के निर्देश दिए थे। इस परियोजना को उच्चाधिकारियों की ओर से मॉनीटर भी किया जा रहा था।
जानकारी के अनुसार टांगरी बरसाती नदी है। इसमें हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों से बारिश का पानी आती है। पिछली बार पहाड़ाें पर अत्यधिक बारिश से छावनी में कई गांव व शहरी इलाका प्रभावित हुआ था। इस बार सिंचाई विभाग ने सर्वे कर 22 गांवों के क्षेत्रों को चिन्हित किया था। पंजाब बॉर्डर से अंबाला कैंट तक इसमें गांवों को कवर किया जाना था। कुल तीन स्ट्रेच पर 40 किलोमीटर तक नदी की खोदाई का कार्य होना था। जिसमें नदी को खोदकर 500 से 600 फुट चौड़ी किया जाना था। 15 जून तक इस टेंडर को पूरा कर दो से तीन ठेकेदारों को जिम्मेदारी दे दी गई थी।
ठेकेदारों को चुनौती थी कि उन्हें टेंडर की सीमा (30 जून) तक इस कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा करना था। मगर मानसून आ गया और यह कार्य कभी शुरू ही नहीं हो सका। खोदाई के बाद करीब 10 लाख क्यूबिट टन मिट्टी को एनएचएआई लेने को तैयार था।