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Ambala News: हाथी,घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की जयकारों से गूंजे मंदिर

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कान्हा बने आर्य प्रताप सिंह, राधा बनी प्रज्ञा के साथ। स्वयं
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संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। छावनी के प्रमुख मंदिरों व गौशाला प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। मध्यरात्रि 12 बजे जैसे ही कान्हा का जन्म हुआ जय श्री कृष्णा और बाल गोपाल और हाथी, घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की के जयकारों से मंदिर गूंज उठे। रेस कोर्स स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर में 75 बर्फ की सिल्लियों से निर्मित अमरनाथ गुफा, भगवान अर्द्धनारीश्वर का शृंगार और खाटू श्याम का जयपुरी गुलाबों से सजा दरबार मुख्य आकर्षण रहा।
वहीं, हिल रोड स्थित प्राचीन श्री सनातन धर्म मंदिर प्रांगण को 10 क्विंटल फूलों से अलौकिक रूप से सजाया गया, जहां सात इलेक्ट्रिक झांकियां और 16 द्रव्यों से हुआ महापूजन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना। रामबाग गौशाला में आयोजित महोत्सव में बृज बोली के निमंत्रण पत्र मेरो जन्मोत्सव के साथ रासलीला व शिव तांडव की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। साथ ही 80 स्टॉलों पर सजे 56 व्यंजनों का भक्तों ने लुत्फ उठाया। सभी स्थानों पर मध्यरात्रि महाआरती के बाद श्रद्धालुओं में 56 भोग व माखन-मिश्री का महाप्रसाद वितरित किया गया।
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रेस कोर्स मंदिर में बर्फ की अमरनाथ गुफा बनी मुख्य आकर्षण
रेस कोर्स स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। मध्यरात्रि 12 बजे जैसे ही भगवान लड्डू गोपाल का जन्म हुआ, पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। मंदिर में उत्सव का मुख्य केंद्र 75 बर्फ की सिल्लियों से निर्मित विशाल बर्फ की अमरनाथ गुफा रही। श्रद्धालुओं ने इस गुफा में प्रवेश कर बाबा अमरनाथ के अलौकिक दर्शन किए। इसके साथ ही मंदिर में भगवान अर्द्धनारीश्वर का किया गया दिव्य शृंगार भी भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। बाबा खाटू श्याम के दरबार में भी भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। जयपुर से मंगवाए गए प्राकृतिक रंग-बिरंगे गुलाबों से तैयार 31 विशेष मालाओं से बाबा का भव्य शृंगार किया गया था।
मंदिर के पुजारी पंडित सतीश थपलियाल ने बताया कि शाम सात बजे से शुरू हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 25 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कलाकारों ने श्री राधा-कृष्ण रासलीला, अघोरी नृत्य, मां काली रूप और हनुमान लीला की ऐसी जीवंत प्रस्तुतियां दीं कि दर्शक भावविभोर हो उठे। रात 12 बजे कान्हा के जन्मोत्सव के साथ ही भगवान को 56 भोग और माखन-मिश्री का महाप्रसाद अर्पित किया गया। इसके बाद महाआरती हुई और उपस्थित सभी श्रद्धालुओं में महाप्रसाद का वितरण किया गया। देर रात तक मंदिर में भजन-कीर्तन और जन्मोत्सव की खुशी का माहौल बना रहा।
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10 क्विंटल फूलों से महका सनातन धर्म मंदिर
छावनी के हिल रोड स्थित प्राचीन श्री सनातन धर्म मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर मंदिर प्रांगण और गर्भगृह को 10 क्विंटल गेंदा, गुलाब और रंग-बिरंगे फूलों से अलौकिक रूप से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर सुगंधित हो उठा। विशेष इत्र सेवा ने मंदिर के वातावरण को और अधिक दिव्य बना दिया। श्री सनातन धर्म सभा के प्रधान प्रमोद गर्ग और महासचिव सुधीर बिंदलस की अध्यक्षता में आयोजित इस भव्य समारोह में सात विशेष इलेक्ट्रिक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। शुक्रवार सुबह मंदिर के पुजारी पंडित बुद्धि वल्लभ शास्त्री और प्रवेश उनियाल के सानिध्य में देवी-देवताओं को गंगाजल से स्नान कराकर नवीन वस्त्र धारण कराए गए। शाम छह बजे सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ के साथ धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए, जिसके बाद देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मध्यरात्रि ठीक 12 बजे जैसे ही कान्हा का जन्म हुआ, पूरा मंदिर जय श्री कृष्णा के जयकारों से गूंज उठा। इस शुभ घड़ी पर दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और इत्र सहित 16 द्रव्यों से भगवान का महापूजन किया गया। इसके उपरांत बाल गोपाल को 56 भोग, पेड़े, माखन-मिश्री और धनिया-पंजीरी का विशेष भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं में महाप्रसाद का वितरण किया गया।

रामबाग गौशाला में मनाया जन्माष्टमी महोत्सव
रामबाग गौशाला प्रांगण में श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव सायं सात बजे से प्रारंभ हुआ यह आयोजन मध्यरात्रि 12 बजे तक चला, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। गौशाला कमेटी के अध्यक्ष राजेश सिंगला और प्रोजेक्ट डायरेक्टर राकेश कंसल की देखरेख में आयोजित इस भव्य समारोह की शुरुआत युगल सरकार के पूजन के साथ हुई। इस बार महोत्सव का प्रथम निमंत्रण पत्र मेरो जन्मोत्सव बृज बोली में तैयार कर कान्हा जी के चरणों में अर्पित किया गया था, जिसने भक्तों को खास रूप से आकर्षित किया। समारोह में मथुरा, भरतपुर और अलीगढ़ से आए कलाकारों ने मनमोहक झांकियों और सजीव नाटकीय प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
निधिवन की रासलीला, शिव तांडव नृत्य, राम दरबार, देवी स्वरूप, भगवान जगन्नाथ और नरसिंह भगवान के स्वरूप की संगीतमयी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महोत्सव का मुख्य आकर्षण 75 से 80 स्टॉलों पर सजे विभिन्न राज्यों के प्रसिद्ध 56 व्यंजन रहे। श्रद्धालुओं ने दिल्ली के चाट कार्निवल, सीताराम बाजार की स्टफ्ड कुल्फी, गोहाना की जलेबी, कैथल के रबड़ी फालूदा और अमृतसर के पंजाबी ढाबे के स्वादिष्ट पकवानों का आनंद लिया। व्रत रखने वाले भक्तों के लिए विशेष फलाहारी स्टॉल लगाए गए थे।
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कान्हा बने आर्य प्रताप सिंह, राधा बनी प्रज्ञा के साथ। स्वयं

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