अंबाला सिटी। सुल्लर गांव में बने प्रदेश के दूसरे बायोगैस प्लांट का कार्य एक अजूबा बन गया है। इस प्लांट का काम छह माह में पूरा होना था मगर आज हालात यह हैं कि तीन साल बीतने पर भी घरों तक बॉयोगैस नहीं पहुंच सकी है। तीन वर्ष पहले पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला का इस प्लांट का शुभारंभ किया था। अब लोग सवाल पूछ रहे हैं कि पाइप लाइन बिछने के बावजूद कार्य पूरा क्यों नहीं हो सका।
अमर उजाला ने इस प्लांट पर पड़ताल की तो पाया कि प्लांट पर काम करीबन पूरा हो चुका है। यहां पर मशीनरी लगने के साथ शेड पड़ चुका और जनरेटर भी लग चुका है। अब बायोगैस प्लांट चलाने को लेकर गोबर एकत्रित करने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का इंतजार हो रहा है और प्लांट में पानी की व्यवस्था होने का इंतजार किया जा रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि हिसार के उकलाना में नया गांव के बाद यह प्रदेश का दूसरा बॉयोगैस प्लांट है।
गोशाला के पास बना यह 85 लाख का गोबर धन प्रोजेक्ट
यह गोबर धन प्रोजेक्ट करीब 85 लाख से बना है। इस प्रोजेक्ट के चलने से ग्रामीणों को सस्ते रेट पर बायोगैस मिलेगी। पहले चरण में करीब 100 घरों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया था। गांव में अब करीब 65 घरों तक पाइपलाइन भी दब चुकी है। प्लांट मोहाली की हाइटेक एनडीटी सर्विसिस कंपनी की ओर से पंचायती राज विभाग के देखरेख में स्वच्छ भारत मिशन के तहत तैयार किया गया है। प्लांट में लगी मशीनरी की देखरेख भी कंपनी करेगी। यह प्रोजेक्ट पंचायती राज विभाग और गांव पंचायत की देखरेख में चलेगा।
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इस प्लांट की क्षमता 400 क्यूम
बॉयोगैस प्लांट में गाेबर का पहले मिक्चर तैयार होगा। इसके बाद एनराेबिक केमिकल रिएक्शन हाेगा। इसमें गाेबर एक तरह से डाइजेस्ट हाेता है। इसके बाद गैस जनरेट हाेगी ताे गैस काे प्यूरीफाई किया जाएगा। गैस अलग हाे जाएगी और गाेबर की गाद काे बाहर निकाल दिया जाएगा। जितना गोबर डालेंगे, उतनी ही खाद भी बाहर निकलेगी।
इस प्लांट की क्षमता 400 क्यूम है और इसमें बायोडिग्रेडेबेल वेस्ट एवं गोबर, पोल्ट्री वेस्ट, किचन वेस्ट आदि रा मैटिरियल के तौर पर इस्तेमाल होगा और प्रतिदिन 8 टन रा मैटिरियल की जरूरत पड़ेगी। राेजाना आठ टन गाेबर की खपत होगी।
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घरों तक दबी पाइपलाइन, मीटर भी लगे
अभी करीब 65 घरों में गैस की पाइपलाइन दबी है। इस लाइन के दबने के साथ ही मीटर भी लग चुके हैं। अब बायोगैस के चलने का इंतजार किया जा रहा है। ग्रामीण पवन कुमार ने बताया कि बीते जनवरी माह में पाइपलाइन दबी थी। बायोगैस प्लांट चलने से ग्रामीणों को सस्ते रेट में गैस मिलेगी। जिससे उनको काफी फायदा होगा।
वर्जन
बायोगैस प्लांट चलाने के लिए गांव पंचायत की तरफ से ट्रैक्टर-ट्रॉली देने की डिमांड आई हुई है। अभी जिला परिषद की बैठक नहीं हो पाई रही है। इस वजह से पंचायत को फिलहाल अपने स्तर पर ट्रैक्टर ट्रॉली की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही यह भी आंकलन किया जा रहा है कि तकनीकी रूप से अभी कितने घरों को गैस दी जा सकती है।
गगनदीप सिंह, सीईओ, जिला परिषद।
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वर्जन
कंपनी की ओर से बायोगैस प्लांट में पूरी मशीनरी लगा दी गई है। यह प्रोजेक्ट पंचायती राज विभाग व पंचायत को चलाना है। उनकी तरफ से ही गैस के रेट तय किए जाएंगे। अगर प्लांट की मशीनरी में कोई दिक्कत आती है तो कंपनी की ओर से ठीक की जाएगी। प्लांट में अभी गोबर फीड किया जा रहा है। गांव में पाइपलाइन लाइन दबने के साथ ही मीटर भी लग चुके हैं।
सुरेंद्र सिंह, सीईओ, हाइटेक एनडीटी सर्विसिस कंपनी।
वर्जन
गांव में बायोगैस प्लांट बनकर तैयार हो गया है। मशीनरी भी लग गई है, लेकिन बायोगैस प्लांट में गोबर लाने के लिए अभी ट्रैक्टर-ट्राॅली की व्यवस्था प्रशासन को करनी है। इसको लेकर डिमांड भेजी गई है। इसके साथ ही प्लांट में पानी की व्यवस्था भी नहीं है। गांव में अभी 65 घरों में पाइपलाइन दबाई गई है।
जसमीत सिंह, सुल्लर गांव सरपंच प्रतिनिधि।