संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। अंबाला छावनी के गांधी मैदान 70 वर्षों से आयोजित हो रहा रामलीला मंचन अब विवादों में घिर गया है। रामलीला मंचन के कार्यक्रम को इस बार नगर परिषद ने सिर्फ दो दिन की अनुमति दी है, उसमें भी 18 शर्तें लगा दी हैं। इसके साथ ही आयोजकों को 50 हजार रुपये की सुरक्षा राशि भी परिषद को जमा करनी होगी। नगर परिषद के इस रवैये को लेकर लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
बुधवार काे नेत्री चित्रा सरवारा ने इस मुद्दे को उठाते हुए अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा है कि 50 हजार की पर्ची सनातन पर प्रहार है। सरवारा ने कहा कि कैंट में हर वर्ष रामलीला की पावन गूंज सुनाई देती रही है मगर नगर परिषद ने इस वर्ष केवल दो दिन, 1 और 2 अक्तूबर की ही अनुमति दी है। यह पहली बार है कि जब हमारे पावन हिंदू पर्व दशहरे की अनुमति इतने नियमों में बांधी गई हो। सरवारा ने कहा कि यह अनुमति-पत्र सनातन पर्व पर प्रतिबंध का प्रतीक बनती जा रही है। जबकि नगर परिषद मेला आयोजित करने को एक-एक महीने के लिए गांधी ग्राउंड दे देता है।
गांधी मैदान की अव्यवस्थाओं पर घेरा
रामलीला मंचन प्रकरण पर चित्रा ने सरकार और प्रशासन को घेरा। उन्होंने कहा की मैदान में सफाई, साइकिल ट्रैक और पेड़ों का पहले से ही कोई रखरखाव नहीं है तो सुरक्षा राशि किस बात की ली जा रही है। गांधी मैदान में गंदगी का अंबार, डेढ़ फुट ऊंची घास और टूटी-फूटी ट्रैक है। वहीं श्री रामलीला कमेटी की विशेष बैठक में पदाधिकारियों ने नगर परिषद द्वारा लगाईं शर्तों पर आक्रोश जाहिर किया है। उन्होंने नगर परिषद के रुख को आस्था के अपमान के समान बताया। चित्रा ने कहा कि श्री रामलीला कमेटी अंबाला की वह संस्था है जो जनता से चंदा लेकर हमारे मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान की राम की लीलाओं का मंचन करती है। उन्हीं पैसों से कई गरीब कन्याओं का विवाह कराती है।
रामलीला आयोजकों को कुछ नियम व शर्तें बताईं थीं। उन्हें दो दिन के आयोजन की अनुमति दी है। यहां पर हाल ही में पौधरोपण और लाखों रुपये से साइकिल ट्रैक बनाया गया है, जिसे नुकसान पहुंच सकता है।देवेंद्र नरवाल, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद
गांधी ग्राउंड में टूटी बैंच। संवाद