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सनातन शब्द का तात्पर्य है, सदैव रहने वाला : गोस्वामी महाराज

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अंबाला। भक्त बांधव संस्था की ओर से श्री सनातन धर्म मंदिर हिल रोड, सब्जी मंडी में आयोजित दो दिवसीय हरि कथा का बड़े धूमधाम से आयोजन किया गया। वृंदावन से आए हुए श्रीपाद भक्तिवेदांत सिद्धांती गोस्वामी महाराज ने इस अवसर पर विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण और श्री राम के विषय में लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि हमें यह जानना चाहिए कि सनातन शब्द का क्या तात्पर्य है, सनातन अर्थात जो सदैव रहने वाला है।
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श्रीमद्भागवतम् और भगवत गीता में भगवान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मैं और सभी जीव सनातन हैं, अर्थात जिनकी कोई जन्म और मृत्यु नहीं होती। आत्मा सदैव अजर और अमर है, भगवान से प्रेम करना प्रत्येक जीवात्मा का मुख्य कार्य है। उन्होंने बताया कि हमें भगवान की लीलाओं में जो बाहरी रूप से दिखाई देता है, हम उसको सत्य मान लेते हैं, पर ऐसा नहीं है, जैसे कि वास्तव में कैकई माता भगवान राम की इच्छा को पूरी करने के लिए ही दशरथ जी से दो वर मांगती हैं, तो यह भगवान राम की इच्छा पर हुआ, इससे वह पापियों का दमन कर सके और अपने भक्तों को सुख प्रदान कर सके। यह रहस्य हमें कथा के माध्यम से श्रेष्ठ गुरुजन ही बता सकते हैं।
भगवान कृष्ण ने भी अनेक लीलाएं कीं, इसमें हर लीला का कोई न कोई रहस्य व कारण छिपा हुआ है। महाराज ने कहा, भगवान वही हो सकते हैं, जिनमें छह गुण हों अर्थात् संपूर्ण ऐश्वर्य, बल, यश, श्री, ज्ञान और वैराग्य। यह सब भगवान ने अपनी विभिन्न लीलाओं के माध्यम से प्रकट किया। कथा में भगवान की लीलाओं के बहुत सुंदर-सुंदर भजन सुनाए गए, इस पर भक्तों ने झूम झूम कर नृत्य किया।
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