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Ambala News: नगर निगम आयुक्त के खिलाफ महापौर ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, जांच की मांग

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10 महीनों से नगर निगम की एक भी हाउस बैठक नहीं बुलाकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी का आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। नगर निगम में महापौर और आयुक्त के बीच चल रहा टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। महापौर शैलजा संदीप सचदेवा ने नगर निगम आयुक्त वीरेंद्र लाठर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव को शिकायती पत्र भेजा है। महापौर ने आयुक्त पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी और नियमों के विरुद्ध कार्य करने के आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। मुख्य सचिव को भेजे पत्र में महापौर ने कहा कि आयुक्त द्वारा पिछले करीब 9-10 महीनों से नगर निगम की एक भी हाउस मीटिंग नहीं बुलाई गई है।
महापौर का आरोप है कि बार-बार पत्राचार करने के बावजूद आयुक्त किसी न किसी बहाने बैठक को टाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि नगर निगम अधिनियम के तहत हाउस मीटिंग बुलाना आयुक्त का संवैधानिक दायित्व है, लेकिन इसकी अनदेखी से शहर के विकास कार्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और निर्णय लटके हुए हैं। इस मामले को लेकर जब नगर निगम कमिश्नर से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन पर उत्तर नहीं दिया।
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हारे विधायक से शिलान्यास कराने पर उठाए सवाल

पत्र में दूसरा आरोप विकास कार्यों के शिलान्यास को लेकर लगाया गया है। महापौर ने कहा कि निर्वाचित महापौर और सदन को दरकिनार कर विकास कार्यों के शिलान्यास पराजित विधायक से करवाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत बताते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों पर किए जा रहे सरकारी खर्च की भी कोई विधिवत स्वीकृति नहीं है। हालांकि महापौर ने पराजित विधायक का नाम नहीं दिया है मगर उनका निशाना भाजपा से अंबाला शहर के पूर्व विधायक और पूर्व राज्य मंत्री असीम गोयल पर है। इस मामले को लेकर जब पूर्व राज्य मंत्री असीम गोयल से बात की गई तो उन्होंने ऐसे किसी पत्र की जानकारी होने से इंकार किया। उन्होंने कहा जब तक वह पत्र पढ़ नहीं लेते हैं तब तक कुछ नहीं कहेंगे।

महापौर की प्रमुख मांगें

महापौर ने आयुक्त वीरेंद्र लाठर की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय विभागीय जांच कराने, नियम विरुद्ध हुए शिलान्यास कार्यक्रमों पर खर्च की गई राशि की जांच कर उसे संबंधित अधिकारियों से वसूलने और दोषी पाए जाने पर आयुक्त के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई करने की मांग रखी है। महापौर ने पत्र के अंत में विश्वास जताया है कि सरकार इस गंभीर विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। अब देखना यह होगा कि मुख्य सचिव इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं।
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पहले भी निगम अफसरों पर लगे आरोप

महापौर शैलजा संदीप सचदेवा से पहले नगर निगम में महापौर का पद शक्तिरानी शर्मा के पास था। उन्होंने भी इसी प्रकार के नगर निगम अधिकारियों पर आरोप जड़े थे। तब उनका कहना था कि उन्हें विकास कार्यों के उद्घाटन में बुलाया तक नहीं जाता है। कार्यों की जानकारी भी नहीं दी जाती है। अब शक्तिरानी शर्मा भाजपा से कालका की विधायक हैं।
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