संवाद न्यूज एजेंसी
बराड़ा। कस्बे में जलभराव का मामला अब मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंच गया है। वीरवार को कई गांवों के किसानों ने अपना दुखड़ा सुनाने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी के पास पहुंचे। राजाेखेड़ी गांव निवासी करमजीत सिंह सैनी ने बताया कि बराड़ा में बाहर से आने वाला पानी मौजगढ़ के रास्ते रेलवे लाइन के नीचे से होता हुआ सज्जन माजरी में जा रहा है। यहां से सड़क पर बनी दो पुलियों के नीचे से पानी तेजगति से दादुपुर होता हुआ राजोखेड़ी, सुभरी और उगाला में जा रहा है। पानी का बहाव इतना तेज है कि इन गांवों के खेतों में पानी पूरी तरह भर चुका है और इससे फसलें जलमग्न हो गई हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री व कैबिनेट मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि नहरी विभाग के उच्चाधिकारियों से उनकी बैठक कराई जाएगी और नाले को दोबारा खुलवाने के आदेश दिए जाएंगे।
नक्शे में भी मौजूद है बैतन नाला
किसान कर्मजीत सैनी ने बताया कि क्षेत्र की पानी निकासी के लिए नदीनुमा एक बड़ा नाला था जो साढौरा की तरफ से आता था और बराड़ा शहर, मौजगढ़, राजोखेड़ी, सुभरी, उगाला, अब्दुल्लागढ़ होते हुए कुरुक्षेत्र जिले के गांवों में चला जाता था। इस नाले से बराड़ा का सारा बरसाती पानी आगे चला जाता था और बाढ़ इत्यादि की स्थिति नहीं बनती थी लेकिन वर्ष 1965-66 में इस नाले को बंद कर दिया गया। इस कारण आज इन गांवों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इस नाले की दिशा उत्तर से दक्षिण की ओर है। बराड़ा के जिन गांवों में यह नाला अभी बचा है, उन गांवों का रिकॉर्ड तहसील में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि गांव सिंबला के लोगों ने उन्हें अपने गांव से गुजर रहे इस नाले का नक्श मुहैया करवाया है, वहीं बराड़ा शहर और अन्य क्षेत्र का नक्शा उनके पास है बाकी नक्शा भी विभाग को मिल सकता है।
अंबाला के बराड़ा से मुख्यमंत्री को मिलने के लिए जाते गांव वासी। संवाद