संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। पिछले कई दिनों से घरों और पंडालों में पूजा-अर्चना और जयकारों से गूंज रहा माहौल सोमवार को गणपति बप्पा की विदाई के साथ भावुक हो गया। अंबाला शहर, कैंट और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों के साथ गणपति की प्रतिमाएं लेकर जनसुई हेड पहुंचे। यहां गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते और गुलाल उड़ाते हुए बप्पा को अंतिम विदाई दी।
विसर्जन के समय कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। श्रद्धालुओं ने अगले बरस बप्पा के फिर से घर आने और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की। सुबह से ही जनसुई हेड पर प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। अगले बरस बप्पा के दोबारा आगमन की कामना के साथ पवित्र जल में प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इसी दाैरान प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था के कड़े प्रबंध किए गए थे, ताकि विसर्जन प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
लोगों ने बप्पा को दी विदाई
जैन बाजार से आए श्रद्धालु राम प्रवेश यादव ने बताया कि वे पिछले छह सालों से लगातार जनसुई हेड पर गणपति विसर्जन के लिए आ रहे हैं। इस बार उन्होंने 17 तारीख को मूर्ति स्थापित की थी और चार दिनों तक विधि-विधान से पूजन के बाद सोमवार को विसर्जन किया गया। वहीं मोती नगर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने पहली बार घर पर गणपति बप्पा की स्थापना की थी। एक सप्ताह तक बप्पा की सेवा करने के बाद उनका विसर्जन किया। अंबाला कैंट से आईं निशा निशा ने बताया कि वह आठ साल से गणपति की स्थापना घर पर कर रही हैं। उन्होंने बताया कि भगवान की कृपा से उनके परिवार सुख-संपन्न है।
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सुरक्षा के किए गए इंतजाम
जनसुई हेड पर विसर्जन के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। पांच से छह गोताखोरों के साथ पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। गोताखोर श्रद्धालुओं को पानी में किनारे से आगे जाने से रोक रहे थे और प्रतिमाओं को खुद पानी में आगे ले जाकर विसर्जित करवा रहे थे। हालांकि, नहर में प्रतिमाओं के साथ धार्मिक सामग्री भी प्रवाहित की गई, जो आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकती है।
जनसुई हेड पर गणपति बप्पा की विदाई से पहले मन्नत मांगती बच्ची। संवाद
जनसुई हेड पर गणपति बप्पा की विदाई से पहले मन्नत मांगती बच्ची। संवाद