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बजट में रखी 9.2 प्रतिशत की ग्रोथ रेट अर्थव्यवस्था के लिए होगी लाभकारी

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अंबाला। राजकीय महाविद्यालय अंबाला कैंट के वाणिज्य विभाग के शिक्षक नायब सिंह जस्सल, लक्की वर्मा और अंग्रेजी विभाग से गुरविंद्र सिंह ने बजट की सराहना की है। कॉलेज में बजट पर चर्चा करते हुए इन्होंने कहा कि सरकार की ओर से 9.2 प्रतिशत की ग्रोथ रेट रखी गई है, वह अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी साबित होगी। इसके अलावा कृषि क्षेत्र के लिए ड्रोन तकनीक भी किसानों के लिए नए आयाम स्थापित करेगी। आरबीआई की ओर से डिजिटल करेंसी लाने से भी अर्थव्यवस्था को काफी लाभ मिलेगा।
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वहीं रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता काफी लाभ देगी। ई पासपोर्ट का भी लाभ मिलेगा। नायब सिंह जस्सल ने कहा कि बजट में नौकरी, घर बनाने, किसानों, कर्मचारियों को रियायत, दिव्यांगजनों के माता-पिता को टैक्स में छूट, छोटे व्यापारियों के लिए और कर क्षेत्रों में महत्वपूर्ण एलान कोरोना महामारी के बाद बिगड़ी हुई व्यवस्था को पटरी पर लाने वाला सिद्ध हो सकता है।
इन्होंने चर्चा में कहा कि डिजिटल यूनिवर्सिटी की स्थापना से देशभर के विद्यार्थियों को उनके द्वार पर ही अधिगम अनुभव के साथ विश्वस्तरीय गुणवत्ता परक सुलभ शिक्षा मिलेगी। वहीं बजट में आत्मनिर्भर भारत से 60 लाख युवाओं को नौकरियां देने की योजना सराहनीय कदम है।
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बजट विकास को प्रोत्साहन देगा
अंबाला। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और अंबाला से सांसद रतनलाल कटारिया ने कहा कि यह बजट विकास को प्रोत्साहन देगा। इससे युवा, महिलाओं, किसानों, अनुसूचित जाति के लोगों को सीधे लाभ पहुंचेगा। कटारिया के मुताबिक वर्ष 2022-23 में एक्सप्रेस मार्ग के लिए पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान का प्रतिपादन किया जाएगा, ताकि लोगों और वस्तुओं का अधिक तेज मूवमेंट हो सके। वर्ष 2022-23 में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में 25000 किलोमीटर जोड़े जाएंगे। पीपीपी पद्धति में चार स्थानों पर मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक पार्क को आरंभ करने के लिए सुविधाएं की जाएंगी।
कटारिया ने कहा कि अगले तीन वर्षों के दौरान 400 नई पीढ़ी की वंदे भारत रेल गाड़ियों का विकास और विनिर्माण किया जाएगा जोकि ऊर्जा क्षमता और यात्रियों के सुखद अनुभव की दृष्टि से बेहतर होगा। साथ ही मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के लिए एक सौ पीएम गति शक्ति कार्गो टर्मिनल्स तैयार किए जाएंगे। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में परंपरागत सड़कों के विकल्प जोकि पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ हों, को वरीयता दी जा रही है। पीपीपी मोड के अंतर्गत एक राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम भी चलाया जाएगा।
कटारिया ने कहा कि रबी 2021-22 में गेहूं की खरीद और खरीफ 2021-22 में धान की अनुमानित खरीद में 163 लाख किसानों से 1208 लाख मीट्रिक टन गेहूं और धान होगा। इसके एमएसपी मूल्य का 2. 37 लाख करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके खाते में किया जाएगा। देशभर में रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके प्रथम चरण में गंगा नदी के पांच किलोमीटर चौड़े कॉरिडोर में आने वाले किसानों की जमीन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अपेक्षित धन लगाकर क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल इंटरप्राइजेज (सीजी टीएमएसई) स्कीम को पुन: जीवित किया जाएगा। इससे सूक्ष्म व लघु उद्यमों को दो लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण मिल सकेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सांसद कटारिया ने बताया कि कौशल विकास कार्यक्रमों और उद्योगों के साथ भागीदारी को नई दिशा दी जा सकेगी। इससे कुशलता के आयामों को लगातार बढ़ावा मिलता रहेगा। इनमें स्थायित्व और रोजगार की क्षमता भी बढ़ेगी। नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) को प्रगतिशील औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाएगा। पीएम ई-विद्या के वन क्लास वन टीवी चैनल कार्यक्रम को 12 टीवी चैनलों से बढ़ाकर 200 टीवी चैनल तक पहुंचाया जाएगा।
रतनलाल कटारिया ने कहा कि वैश्विक मांग को पूरा करने, घरेलू क्षमता निर्माण तौर तरीकों की सिफारिश करने के लिए स्थापित किया जाएगा। दूर संचार क्षेत्र सामान्य रूप से दूर संचार और विशेष रूप से 5जी प्रौद्योगिकी, संवृद्धि और रोजगार अवसर प्रदान करने में समर्थ बना सकते हैं। अपेक्षित स्पेक्ट्रम नीलामियों को निजी दूरसंचार प्रदाताओं द्वारा 2022-23 के भीतर 5जी मोबाइल सेवाओं के आरंभ को सुकर बनाने के लिए 2022 में निष्पादित किया जाएगा।
कटारिया ने कहा कि रक्षा में सरकार निर्यातों को कम करने और सशस्त्र बलों के लिए उपकरणों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। पूंजीगत खरीद बजट के 2021-22 में 58 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2022-23 में घरेलू उद्योग के लिए 68 प्रतिशत तक किया जाएगा। सौर ऊर्जा 2030 तक संस्थापित सौर क्षमता के 280जीडब्ल्यू के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए घरेलू विनिर्माण को सुविधा प्रदान करने के लिए, सौर पीवी मॉड्यूलों के लिए पॉलीसिलीकॉन से पूर्णत: समेकित विनिर्माण एककों के लिए प्राथमिकता के साथ उच्च प्रभावी मॉड्यूलों के विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन हेतु 19,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा। वर्ष 2022-23 में पीएम आवास योजना में 80 लाख नए मकान बनाए जाएंगे। इसके लिए 48 हजार करोड़ रुपये का फंड रखा गया है।
टैक्स को लेकर कोई भी परिवर्तन नहीं किया गया है। इस कारण मध्यम वर्ग को जो आस थी, वह पूरी नहीं हुई है। इसके अलावा सरकार ने ज्वेलरी को सस्ता किया है। इसकी कोई जरूरत नहीं थी। दूसरी ओर, रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर करने को लेकर कुछ कदम उठाए हैं, जोकि सराहनीय हैं।
- डॉ. नीति, अर्थशास्त्री।
बजट से अर्थव्यवस्था होगी सुदृढ़, देश बनेगा आत्मनिर्भर : डॉ. संजय शर्मा
अंबाला। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रमुख डॉ. संजय शर्मा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट 2022-23 की सराहना करते हुए इसे जन-कल्याणकारी व दूरदर्शी सोच का परिचायक बताया है। डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि यह बजट अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ व देश को आत्मनिर्भर बनाने और आम जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरने वाला बजट है। डॉ. शर्मा ने कहा कि यह बजट किसानों की आय को दोगुना करने वाला और शक्तिशाली भारत के निर्माण का बजट है। डॉ. शर्मा ने कहा कि गांव, किसान, युवा, उद्यमियों व मध्यम वर्गीय लोगों को ध्यान में रखकर आम बजट तैयार किया गया है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बधाई के पात्र हैं।
शर्मा ने कहा कि यह बजट सही मायनों में लोकतंत्र के पवित्र मूल्यों की अक्षुण्णता को समर्पित है। आजादी के अमृत महोत्सव वाले साल में पेश यह बजट निश्चित रूप से आत्मनिर्भर भारत की आशाओं व आकांक्षाओं पर खरा उतरने वाला है। डॉ. संजय शर्मा ने कहा कि राष्ट्रोत्थान की नई परिभाषा लिखने वाले इस बजट में देश के सभी वर्गों का विकास निहित है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा तथा समृद्ध राष्ट्र के हमारे लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
यह बजट जुमलों का बजट है। भाजपा सरकार आगे दौड़ पीछे छोड़ की नीति पर चल रही है। पिछले बजट में की गई घोषणाओं का कोई आकलन नहीं हुआ है। आगे फिर से घोषणाएं कर दी गई हैं। वहीं भाजपा द्वारा 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी करने का दावा था, लेकिन किसानों की आय दोगुनी होने की बजाय उनकी मुसीबतें ही बढ़ी हैं। इतना ही नहीं एमएसपी की गारंटी का प्रावधान भी इस बजट में नहीं है। इस बजट में युवाओं को लाखों की संख्या में रोजगार देने की घोषणा हुई है, मगर सरकार रोजगार लाएगी कहां से, सरकार तो निजीकरण की तरफ बढ़ रही है। यह एक दुखद बात है। वहीं आम आदमी को इस बजट में कहीं स्थान ही नहीं दिया गया।
-वरूण चौधरी, मुलाना विधायक।
सिर्फ मोदी सरकार की अनर्थ नीति नजर आई : रोहित जैन
कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष रोहित जैन ने कहा कि केंद्र सरकार के बजट-2022 में जनता के लिए कुछ नहीं है। इस बजट में सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की गलत नीति नजर आई है। उन्होंने कहा कि विगत दो वर्षों से दुनिया महामारी का दंश झेल रही है। भारत एक बड़ी आबादी वाला देश होने के कारण कोरोना वायरस की वजह से चौतरफा संकटों से घिरा हुआ है। देश में सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक संकटों ने यहां के नागरिकों को भविष्य के प्रति आशंकित कर रखा है। अभी भी महामारी का खतरा गया नहीं है और स्वास्थ्य की कई चुनौतियां लोगों के जीवन को प्रभावित किए हुए हैं। ऐसे समय में बजट से सिर्फ निराशा ही झलक रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की अनर्थ नीति ने देश पर ऋण बढ़ाने का काम किया है। मोदीनॉमिक्स ने अर्थव्यवस्था को तबाह किया है, देश के लिए मोदी सरकार की गलत नीति हानिकारक साबित हुई है।
जैन ने कहा बजट पेश होने के साथ यहां उन लोगों को तगड़ा झटका लगा जो यह सोचकर बैठे थे कि इस बजट में वित्त मंत्री इनकम टैक्स स्लैब में कोई राहत भरे बदलाव का एलान करेंगी।
उन्होंने कहा की भारत के वेतनभोगी वर्ग और मध्यम वर्ग महामारी, चौतरफा वेतन कटौती और बैक ब्रेकिंग मुद्रास्फीति के समय में राहत की उम्मीद कर रहे थे। वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री ने उन्हें प्रत्यक्ष कर उपायों में फिर से निराश किया है। यह भारत के वेतन वर्ग और मध्यम वर्ग के साथ विश्वासघात है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ा है। परिणामस्वरूप उपभोग खर्च में काफी कमी आई है। आर्थिक सर्वेक्षण 2022 के आंकड़ों ने मोदी सरकार की विफलताओं की पोल खोल कर रख दी है।
अब तो सरकार ने भी मान लिया है कि ईंधन की कीमतें महंगाई बढ़ाने का काम कर रही हैं। बेलगाम ईंधन की कीमतों की वजह से आम आदमी की जिंदगी लगातार मुश्किल होती जा रही है, जबकि सरकार अपना खजाना भरने में लगी हुई है। व्यक्तिगत रूप से मैं मध्यम वर्ग के लिए एलपीजी की कीमत और कर राहत में कमी की उम्मीद कर रहा था, लेकिन ऐसा लगता है कि अगले साल चुनाव से पहले ही उन्हें यह मिलेगा। मध्यम वर्ग भारतीय अर्थव्यवस्था के श्रवण कुमार की तरह है, जिसे इस सरकार से आशीर्वाद के अलावा कुछ भी नहीं मिलता है।
जैन ने कहा कि बजट 2022 ने देशवासियों की उम्मीदों को कुचलने का काम किया है। बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक तंगी के इस माहौल में राहत की उम्मीद में बैठी जनता को सिर्फ निराशा हाथ लगी है। बीजेपी सरकार ने फिर साबित कर दिया कि उसे नौकरीपेशा, मध्यम वर्ग, गरीब, किसान, युवा, छोटे उद्योगों से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने कहा कि देश बजट में मजबूत आर्थिक नीतियां चाहता है, न की जुमला नीतियां।
चालू वित्त वर्ष के बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोई विशेष रियायतों की घोषणा नहीं की गई है। बजट ने वरिष्ठ नागरिकों को निराश किया है। सरकार को नए वृद्ध आश्रम खोलने, निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने, विकलांग वरिष्ठ नागरिकों के लिए ट्राइसाइकिल आदि की व्यवस्था के साथ-साथ निशुल्क धार्मिक यात्रा, संपत्ति की सुरक्षा और संतान से खर्चे के अधिकार को सुनिश्चित बनाने के लिए विशेष बजट व अनुदान नीति का प्रावधान करना चाहिए।
धर्मपाल, वरिष्ठ नागरिक
वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट में आयकर स्लैब में बदलाव न करके आम आदमी व मध्यवर्गीय क्लास को कोई राहत प्रदान नहीं की गई। आयकर स्लैब में कटौती करके ज्यादा लोगों को आयकर के दायरे में लाना चाहिए। विशेषकर नौकरी पेशा लोगों और व्यापारी की जेब में अधिक पैसा होने का अर्थ है, उनकी व्यय शक्ति में वृद्धि करना, जिससे आर्थिक चक्र को गति प्रदान की जा सकती है जो आर्थिक विकास का मूल है ।
विकास सिंगला, सदस्य व्यापार संगठन
रसोई गैस, आटा, चावल, दाल, खाद्य तेलों और सब्जियों के आसमान छूते दाम ने आम ग्रहणी का बजट पहले ही बिगाड़ रखा है। बजट में भी किसी प्रकार की आवश्यक वस्तुओं पर राहत तथा अनुदान प्रदान न करने की घोषणा से आम ग्रहणी की मुश्किलें कम होती दिखाई नहीं देती हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण स्वयं नारी होते हुए भी आम भारतीय ग्रहणी के प्रति संवेदनशील दिखाई नहीं देती। निराश करने वाले बजट से गरीब की थाली का स्वाद और भी कसैला हो गया है।
परमप्रीत कौर, गृहणी
भारत में शिक्षा विशेषकर, व्यवसायिक शिक्षा पहले से ही अत्यंत महंगी है जो साधारण और मध्यम वर्गीय विद्यार्थी व अभिभावक के बल बूते से बाहर है। वित्त मंत्री को शिक्षा क्षेत्र में भारी भरकम फीस पर नियंत्रण तथा गरीब छात्रों के लिए मुफ्त शिक्षा का वैधानिक प्रावधान करना चाहिए, ताकि शिक्षा का लाभ अंत्योदय तक पहुंच सके। सरकार को फ्री शिक्षा तथा स्वास्थ्य की ओर अधिक ध्यान देकर निमन व मध्य वर्ग को राहत प्रदान करनी चाहिए, जिससे आमजन की परेशानी को कम करने की सार्थक पहल हो सके।
डॉ. प्रवीण वर्मा, प्राचार्य
यह बजट विकास को बढ़ावा देने वाला है। इसमें सभी वर्गों का ध्यान रखा गया है। इस बजट से किसानों को भी लाभ होगा। इसके साथ ही 60 लाख नौकरियों की घोषणा से युवाओं के लिए भी नौकरियों में कई सुअवसर मिलेंगे।
मनदीप सिंह बोपाराय, अध्यक्ष जेजेपी, हल्का मुलाना।
इस बार का बजट बेहतरीन बजट है। इसमें सभी वर्गों के हितों को अग्रणी स्थान दिया गया है। युवाओं को रोजगार के साथ-साथ गरीब के कल्याण को आगे रखते हुए बजट पेश किया गया है। बजट में किसानों को विशेष स्थान दिया गया है, इससे साबित होता है कि भाजपा किसान हितकारी है।
श्रीपाल जैन, भाजपा वरिष्ठ नेता।
यह बजट केवल एक भ्रम है। इस बजट से न किसान खुश हैं और न ही युवा। महंगाई चरम पर है। इसके लिए बजट में कुछ नहीं किया गया है। बीजेपी के पास विकास को लेकर कोई मुद्दा ही नहीं है। जब किसान और युवा ही खुश नहीं हैं तो बजट कैसा।
करनैल सिंह, जिला अध्यक्ष अम्बाला, बसपा।
बजट सभी वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है। बजट का एक महत्वपूर्ण पहलू गरीब का कल्याण है। इस बजट में हर गरीब के पास पक्का घर, नल से जल, उसके पास शौचालय हो, गैस की सुविधा हो, इन सभी पर विशेष ध्यान दिया गया है। वहीं किसानों के हितों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
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मोनिका कालड़ा, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अंबाला।
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