संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी के एकता विहार स्थित कीर्ति नगर के शिव कुटीर धर्मशाला में 14 अप्रैल से 22 अप्रैल तक चल रही श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के चौथे दिन बाल लीलाओं से लेकर सीताराम विवाह के प्रसंग का वर्णन किया गया। यह प्रसंग सुनकर भक्त भावविभोर हो गए।
कथा वाचक डॉ. स्वामी महामंडलेश्वर श्री शिव चैतन्य महाराज ने बताया कि जनक ने सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रचाया। सीता के स्वयंवर में आए सभी राजा-महाराजा जब भगवान श्री शिव का धनुष नहीं उठा सकें, तब ऋषि विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम से आज्ञा देते हुए कहा- हे राम उठो, शिवजी का धनुष तोड़ो और जनक का संताप मिटाओ गुरु विश्वामित्र के वचन सुनकर श्रीराम तत्पर उठे और धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए आगे बढ़े।
यह दृश्य देखकर सीता के मन में उल्लास छा गया। प्रभु की ओर देखकर सीता ने मन ही मन निश्चय किया कि यह शरीर इन्हीं का होकर रहेगा या तो रहेगा ही नहीं।श्रीराम कथा के चौथे दिन सुबह सात बजे से 8:30 तक मंत्रोच्चारण के बीच यज्ञ कर्ता पं सतीश शांडिल्य द्वारा आज यजमान गणेश विहार निवासी कमल किशोर शर्मा,रेखा शर्मा, नीतिश शर्मा,अभिषेक शर्मा,रुद्राक्षी शर्मा प्रत्यक्ष शर्मा और पालम विहार निवासी धनेश हरजाई, मीरा हरजाई, प्रतीक, स्वाति आदि मौजूद रहे।