अंबाला सिटी। सुशासन दिवस व पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेयी की जयंती पर पुलिस डीएवी स्कूल के ऑडिटोरियम में काव्य संध्या का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में सीएम नायब सिंह सैनी बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे तो विश्व विख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं की शैली से सभी लोगों का मन मोह लिया। उन्होंने अटल बिहारी बाजपेयी के जीवन से जुड़े वो किस्से सुनाए जो शायद ही कभी अंबाला के लोगों ने सुने हों। वहीं कविताओं के माध्यम से सत्ता से लेकर विपक्ष तक को कवि नसीहत देते दिखे। उन्होंने अटल बिहारी बाजपेयी का जिक्र करते हुए कहा कि वह ऐसे व्यक्ति थे जो चुनाव हारने पर अपने ऊपर भी कविता लिख देते थे। उन्होंने चुनाव हारने पर लिखा था कि चौराहे पर लुटता चीर, प्यादे से पिट गया वजीर....। इस दौरान पूर्व राज्य मंत्री असीम गोयल भी मौजूद रहे।
डॉ. कुमार ने यह मर्मज्ञ किए साझा
दो कवि एक साथ नहीं बैठ सकते
कवि कुमार विश्वास ने बताया कि स्व. अटल बिहारी बाजपेयी से पहली मुलाकात अपने उत्तर प्रदेश के पिलखुआ कस्बे में हुई। हमने एक कवि सम्मेलन और साहित्य समारोह आयोजित किया था। तब मैं बीए प्रथम वर्ष में था। उस वक्त अटल जी एमपी का चुनाव नहीं जीत पाए थे। लाला गंगासहाय की धर्मशाला में दोपहर के समय हम सभी कार्यक्रम की व्यवस्था कर रहे थे। धर्मशाला के बाहर सब्जी वाले ने बताया कि जो व्यक्ति शाम को कार्यक्रम में आने वाले थे वह तो अभी आ गए। देखा तो एक एंबेस्डर कार की पिछली सीट पर अटल बिहारी बैठे थे। उस समय पहली बार उन्हें हकीकत में देखा था। पहली बार उनसे मिला तो उन्होंने मेरे परिचय पूछा तो मैंने तपाक से उन्हें बताया कि मैं कवि हूं। इसके बाद जब उनके साथ गाड़ी में बैठने के लिए मैंने पीछे का दरवाजा खोला तो उन्होंने मुझे रोक दिया और कहा कि आप आगे बैठो, दो कवि एक साथ नहीं बैठ सकते। उन्होंने अपने इस अंदाज से मुझे सहज किया। इसी दौरान कार्यक्रम कराने को एक सेठ से चंदा लिया था, मगर शर्त थी कि स्वागत भाषण वह पड़ेंगे। जब समय आया तो सेठ बोल गए कि शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले.. यह सुन सभी हस पड़े। यह बात अटल जी को हमेशा याद रही। हम उन्हें बाबूजी कहकर बुलाते थे। वह आगे चलकर प्रधानमंत्री बने तो हमेशा पूछते थे कि वह सेठ जी कैसे हैं जिन्होंने हमें जीवित से शहीद बना दिया था। कविताओं और मर्मज्ञ के बीच-बीच में डॉ विश्वास ने भाजपा नेताओं पर चुटकी भी ली। उन्होंने कहा कि हरियाणा हास्य कला की भूमि है।
घुटने नए नए हैं जल्दी न टेक देना
शिखरवार्ता के बाद पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के घर पर एक शाम कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। उसमें कई बड़ी हस्तियां पधारीं थीं। उस दौरान मैं सभी कवियों में सबसे छोटा था। उस दिन उनका जन्मदिन था। मैंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी से कहा कि शिखरवार्ता तीन दिन चल गई है, कशमकश चल रही थी। उससे कुछ समय पहले उनके घुटनों का प्रत्यारोपण हुआ था। वह एक प्रचारक के रूप में देशभर में यात्राएं कर रहे थे। उस समय मैंने उनसे कहा कि हमारे एक कवि ने कुछ पंक्तियां आपको सुनाने को कहा है, उन्हें सुनाना चाहता हूं। अनुमति मिली तो कहा कि कवियों ने कहा कि कितने भी दिन लगाना परिणाम नेक देना, घुटने नए नए हैं जल्दी न टेक देना। इन पंक्तियों को सुन सभी हैरान रह गए। उस समय मेरा आत्मबल अचानक से कम हो गया। जैसे-तैसे कविता पढ़ी। कोई मुझसे मिलना नहीं चाह रहा था, क्योंकि मैंने ऐसी कविता पढ़ दी थी। उस समय अटल जी की समझ में आ गया कि यह लड़का ग्लानी से भर गया है। उन्होंने बुलाया और मेरे साथ फोटो खिंचवाने को कहा। डॉ. विश्वास ने मना किया तो वह बोले नहीं नहीं तुम्हारे साथ तो जरूर फोटो खिंचवाऊंगा नहीं तो तू कहेगा घुटने नए नए हैं खड़ा भी नहीं हो पा रहा। गलती को ठीक कर देना का कौशल भी उन्हीं में था।
कांग्रेस की राजनीति चंद परिवार तक सीमित रही
कांग्रेस के बारे में बोलते हुए डॉ विश्वास ने कहा कि कांग्रेस ने इस देश में आजादी के आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके पास ऐसे बहुत से अच्छे लोग थे। मगर यह अद्भुत बात थी कि उन्होंने कालांतर में कुछ ही लोगों पर ध्यान दिया जो उनके परिवार में ही थे जिनके पीछे नेहरू या गांधी लगा था। बहुत से लोगों को कांग्रेस दफ्तर से बाहर कर दिया। उसी का लाभ उठाकर यह (भाजपा) लोग सरकार पटेल को साथ ले गए। अब बेचारे परेशान होते हैं कि सरकार पटेल इनके कैसे हुए। तुमने पूछे नहीं यह ले गए और इन्होंने मूर्ति बनवा दी।
अभी विपक्षी को विरोधी मान रहे
डॉ विश्वास कहा कि संसद में पहले जो नेता भाषण देते वह समय नहीं रहा है। अभी तो यह स्थिति हो गई कि विपक्षी को विरोधी माना जा रहा है। विपक्ष का मतलब यह है कि इस बार जनता ने आपके विचार को कहा है कि प्रदेश चलाइये देश चलाइये और विपक्ष को कहा है दूसरी तरफ बैठे। पूर्व प्रधानमंत्री ने पहली बार गठबंधन सरकारों को स्वीकार्यता दिलाई थी। कॉमन मिनिमम एजेंडा भी उन्ही के विचारों के कारण आज सफल हो सका है। पहले सीमा पर कोई बेटा बलिदानी हो जाता था तो उसकी वर्दी व सामान आता था, अटल जी ने सुनिश्चित किया कि अगर कोई शहीद होता है तो उस बेटे का शरीर गांव तक पहुंचेगा और सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
भाजपा की तीन पीढ़ियां बता हंसाया
डॉ कुमार विश्वास ने कहा कि भाजपा में तीन पीढ़ियां थी। एक पीढ़ी अटल आणवाणी की थी, जो कहती थी कि आपके घर के सामने कोई कूड़ा फैंके से उससे मत लड़ों खुद ही साफ कर दो। दूसरी पीढ़ी मोदी और अमित शाह की है जो कहती है कि कोई कूड़ा फैंके तो उसे पकड़कर लाओ और उसी से साफ कराओ। तीसरी पीढ़ी योगी आदित्यनाथ की है जो कहती है कि जो कूड़ा फैंके उसे भी साफ करो।
दिल्ली के प्रदूषण पर ली चुटकी
डॉ कुमार विश्वास ने कहा कि लोग मुझे कहते हैं कि कार्यक्रमों में आप अचानक से टिप्पणी कैसे कर देते हैं। कल एक कार्यक्रम में रक्षामंत्री बैठे थे तो मैंने टिप्पणी कर दी। दिल्ली में प्रदूषण था, जिसमें मेरा भी हिस्सा था, मगर अब वह हट गया न। अब तो आप ही नगर पालिका से लेकर राज्य और केंद्र में आप हो। तीन टायर की सरकार चल रही है और उसके बाद भी दिल्ली में सांस लेने पर 100 सिगरेट पीने जितना प्रदूषण आप ले रहे हैं। अब पानी की स्थिति भी ऐसी होने जा रही है कि कुछ दिन बाद उसमें शराब का आनंद आने वाला है। पूरी दुनिया से लोग दिल्ली में पार्टी करने आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के सर्वोच्च व्यक्ति के पास एक ऐसा सलाहकार होना चाहिए जो उसे हकीकत से रूबरू कराए।
अंबाला शहर स्थित पुलिस ऑडिटोरियम सभागार में आयोजित अपने अटल कार्यक्रम में लोगों का अभिवादन स
अंबाला शहर स्थित पुलिस ऑडिटोरियम सभागार में आयोजित अपने अटल कार्यक्रम में लोगों का अभिवादन स
अंबाला शहर स्थित पुलिस ऑडिटोरियम सभागार में आयोजित अपने अटल कार्यक्रम में लोगों का अभिवादन स
अंबाला शहर स्थित पुलिस ऑडिटोरियम सभागार में आयोजित अपने अटल कार्यक्रम में लोगों का अभिवादन स