अंबाला सिटी। नगर निगम क्षेत्र में गंदगी का आलम है। सेक्टर हो या कॉलोनियां। हर जगह के लोग गंदगी से लोग परेशान हैं। गंदगी का मुद्दा पहले भी लोग उठा चुके हैं। यही नहीं मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम में भी सफाई और कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठ चुका है।
शहर के नाहन हाउस के नजदीक वाल्मीकि नगर में जिला स्तरीय स्वच्छता अभियान कार्यक्रम में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। उनके सफाई के बारे में किए गए सवाल पर भी अधिकारियों ने सफाई कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उनके सामने रखा। हैरानी की बात तो यह है कि निगम ने जो डंपिंग प्वाइंट बनाए हैं, वहां से भी कूड़ा समय पर नहीं उठता।
अमर उजाला ने नाहन हाउस वाल्मीकि नगर का वास्तविकता का पता किया तो पाया कि नाले और नालियों में गंदगी से अटी है। नालों में सफाई नहीं की गई। कई जगहों पर कूड़े के ढेर लगे थे। यही नहीं जहां राज्यपाल का कार्यक्रम था। उसके थोड़ी दूरी पर ही गंदगी के ढेर थे। शहर के विकास विहार में कूड़ा खुले में था। पशु कूड़े को खा रहे थे। नागरिक अस्पताल, सोहन लाल डीएवी स्कूल के पास और टीबी रोड पर, आर्य मंदिर के पास, पुलिस चौकी नंबर-दो और सर्कुलर रोड पर भी कई जगहों पर कूड़ा बिखरा था।
मेयर ने लगाए अनदेखी के आरोप
नगर निगम मेयर शक्ति रानी शर्मा ने भी कार्यक्रम खत्म होने के बाद अनदेखी के आरोप लगाए। हरियाणा राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय के पहुंचने पर भाजपा पार्षदों और प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। इस पर मेयर ने कहा कि उनके मामले में कभी प्रोटोकॉल की पालना नहीं की गई। हमेशा ही अवहेलना की गई है चाहे वह किसी भी प्लेटफार्म पर हो। ऐसा कब तक चलेगा।
मेयर ने यह भी कहा कि राज्यपाल के सामने महिला ने जो आवाज उठाई है, वह सही है। उसने गलत नहीं बोला है, हालांकि उनका उस महिला से कोई लेना-देना नहीं है। मेयर ने कहा कि राज्यपाल के आने पर जैसी सफाई शहर में हो सकती है तो ऐसी सफाई रोजाना क्यों नहीं हो सकती। जितना पैसा निगम सफाई के लिए खर्च कर रहा है, उस तरह से शहर चमकना चाहिए था। मेयर ने कहा कि निगम में सफाई कर्मचारियों की कमी है। वह कर्मचारियों को पूरा करने के लिए हमेशा आवाज उठाती रही हैं।
मुख्यमंत्री के समक्ष उठा था मुद्दा
17 सितंबर को शहर के एसए जैन कॉलेज में मुख्यमंत्री मनोहर लाल का जनसंवाद कार्यक्रम था। उस दौरान वार्ड-7 भाजपा पार्षद मोनिका मल ने शहर में सफाई कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाया था। अवगत करवाया था कि शहर में सफाई कर्मचारियों की संख्या कम है। अगर वह नाले साफ करते हैं तो शहर की सफाई का कार्य प्रभावित होता है और शहर में सफाई करते हैं तो नालों की सही तरीके से सफाई नहीं हो पाती। उन्होंने मांग की थी कि करीब 250 कर्मचारी शहर के लिए लगाएं जाएं। मुख्यमंत्री को पार्षदों ने बताया था कि नगर निगम में सफाई कर्मचारियों के करीब 650 स्वीकृत पद हैं, जबकि 450 कर्मचारी कार्यरत है और 250 पद खाली हैं। वार्डों में जनसंख्या के हिसाब से कर्मचारी कम हैं। वहीं, निगम में 90 पक्के कर्मचारी और 415 कच्चे कर्मचारी कार्यरत हैं।
वास्तविक जांच
जैसे ही नाहन हाउस चौक से अंदर वाल्मीकि नगर बस्ती में जाते हैं तो नालियां गंदगी से भरी मिली। नालों में पानी जमा था। साथ ही लिफाफे और कूड़ा होने से पानी की निकासी नहीं हो रही थी। सड़कें भी उखड़-खाबड़ बनी हैं। जहां पर सफाई कर दी गई है, वहां से कूड़ा नहीं उठाया गया। बेसहारा पशु कूड़े में मुंह मारते दिखे। कई जगहों पर नालियां टूटी पड़ी हैं। नालियों में मलबा टूटकर गिरा हुआ है। नाले में लोहे का जंगला भी टूटा हुआ पड़ा था। कई जगहों पर कूड़े के ढेर लगे मिले। सड़कों पर भी साफ-सफाई नहीं मिली।
बारिश के दिनों में ज्यादा दिक्कत : रविकांत
स्थानीय निवासी रविकांत का कहना है कि बारिश के दिनों में सीवरेज व नालों का पानी ओवरफ्लो होकर घरों में जमा हो जाता है। एरिया में सीवरेज भी सही तरीके से नहीं डले हुए हैं। ज्यादातर सीवरेज बंद पड़ा है। सड़कों की हालत भी दयनीय है।
समय पर नहीं होती सफाई : मोहित
स्थानीय निवासी मोहित का कहना है कि नाले और नालियों की सफाई समय पर नहीं होती। नालियां और नाले गंदगी से अटे हैं। हर तरफ गंदगी का आलम हैं। कई लोग यहां से बाहर किराये पर भी जाकर रहने लगे हैं। बिजली की तारों की स्थिति भी काफी खराब है। पुरानी तारों को बदला नहीं गया है, बल्कि पैच लगाकर दोबारा चला दिया जाता है।
वर्जन
ऐसा नहीं है कि इस एरिया में सफाई नहीं कराई जाती। सफाई कर्मचारियों की कमी के कारण भी दिक्कत आ रही है। उन्होंने सफाई कर्मचारियों का मुद्दा भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल के जनसंवाद कार्यक्रम में उठाया था कि शहर में 250 सफाई कर्मचारी रखे जाएं ताकि सफाई का कार्य प्रभावित न हो। उन्होंने लोगों से भी आह्वान किया कि वह खुद भी जागरूक हों।
मोनिका मल, पार्षद, वार्ड-7