श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मणी का स्वरूप धर विवाह की रस्म पूरी करते ईवया और महक। प्रवक्
कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुन भाव विभोर हुए भक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। एकता विहार स्थित कीर्ति नगर के श्री शिव मंदिर धर्मशाला में श्रीमद्भागवत कथा आयोजित हुई। कथा व्यास डॉ. स्वामी शिव चैतन्य महाराज ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं भक्तों के चित्त को आकर्षित कर उनके पापों का हरण करती हैं। जब भक्त अपना सर्वस्व प्रभु को सौंप देता है, तभी जीवन में रास घटित होता है।
सुनाम-संगरूर से पधारे स्वामी हरि चैतन्य महाराज ने महारास की व्याख्या करते हुए कहा कि जीव और ब्रह्म का मिलन ही महारास है। उन्होंने बताया कि जब भक्ति में अहंकार आता है, तो प्रभु ओझल हो जाते हैं। गोपियों ने जब हृदय की पीड़ा से गोपी गीत गाया, तब ठाकुर जी पुन प्रकट हुए। भागवत के ये पंच गीत पंच प्राण हैं, जिन्हें भाव से गाने वाला सहज ही वृंदावन भक्ति प्राप्त कर भवसागर से पार हो जाता है। पंडित सतीश शांडिल्य ने बताया कि कथा के दौरान ईवया और महक ने श्रीकृष्ण-रुक्मणी का स्वरूप धरकर विवाह की रस्म पूरी करवाई, जिससे पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा।