अंबाला। रविवार सुबह आसमान से इतना पानी बरसा कि पूरा शहर नदी में तब्दील हो गया। हर गली, मोहल्ला, सड़क पानी से लबालब हो गई। लोगों के घरों में पानी घुस गया। जलभराव के कारण कपड़ा मार्केट बंद रखनी पड़ी। दूसरी ओर, टांगरी और मारकंडा नदी के साथ लगती दर्जनों कॉलोनियों के निवासियों की सांसें अटकी रही। साढ़े छह हजार क्यूसेक पानी आने पर लोग पूरा दिन नदी की ओर देखते रहे। दोपहर बाद जब नदी में पानी कम होने लगा तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।
ऐसी ही स्थिति मारकंडा नदी की भी बनी रही। नदी में पानी के आने की सूचना मिलते ही प्रशासन अलर्ट मोड में रहा, ताकि बिगड़ती स्थिति को संभाला जा सके। मौसम विभाग के अनुसार कुल 92.8 एमएम बारिश हुई है। वहीं, अभी आगामी दिनों में भी बारिश के आसार है। पिछले दो माह से बारिश की तैयारियों का दावा कर रहे प्रशासन की रविवार को पोल खुल गई। 92.8 एमएम बारिश से पूरा शहर पानी-पानी हो गया। कई जगह घुटनों से ऊपर तक पानी जमा रहा। यही स्थिति दोपहर तक बनी रही। खासकर एशिया की सबसे बड़ी मार्केट कही जाने वाली कपड़ा मार्केट में भी स्थिति काफी खराब हो गई। हालात यह थे कि दुकानदार व कर्मचारियों को दुकान तक पहुंचने की जगह ही नहीं मिली। वहीं, जिन दुकानों का लेवल नीचा था उन दुकानों में पानी तक भर गया। घरों में पानी जमा होने के कारण लोग सामान को ऊंचे स्थान पर रखने में जुट गए। वहीं, सड़क पर वाहन पानी के बीच में ही बंद हो गए।
पॉश कॉलोनियों में भी नहीं उतरा पानी
सेक्टर 7, 8, 9, 10 सभी का यही हाल था, जहां शाम तक पानी नहीं उतरा। लोग पानी के बीच में से गुजरने को मजबूर हुए। वहीं, इंको स्थित अंडर पास के नीचे पानी जमा होने से बड़ी गाड़ियां फंस गई। यह स्थिति सभी अंडर पास की थी।
मारकंडा का जलस्तर इस साल सबसे ऊपर
मुलाना। पहाड़ी क्षेत्र में हुई बरसात के कारण शनिवार की रात मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ते हुए 7 फीट 1 इंच 29 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया था। यह जलस्तर इस वर्ष का मारकंडा नदी का सबसे अधिक स्तर था। रविवार देर शाम काला आम्ब में मारकंडा नदी के जल स्तर घटने पर नहरी विभाग ने चेन की सांस ली। इसके बावजूद विभाग ने मुस्तैदी बरकरार रखी। रविवार शाम पांच बजे मारकंडा नदी का जलस्तर करीब 3 फीट व 6 हजार क्यूसेक रह गया। नहरी विभाग के एसडीओ मुलाना नितीश चंदेल ने बताया कि ऊपरी क्षेत्र में पानी कम हो गया है। मुलाना में भी जलस्तर बहुत कम हो जाएगा। इसके बावजूद कोई भी नदी के किनारे न जाए।
नगर निगम की लापरवाही से भरा पानी
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष एडवोकेट रोहित जैन ने स्थिति के लिए शहर के विधायक व मेयर को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही नगर निगम की खराब इंजीनियरिंग पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए निगम की इंजीनियरिंग ब्रांच पानी निकासी का आकलन किए बिना ही इंटरलोकिंग टाइल वाली सड़कों का निर्माण करने में जुटी है। सीएम मनोहर लाल को पूरे मामले की जांच स्टेट विजिलेंस ब्यूरो से करवानी चाहिए।
पानी निकासी के कार्य में जुटे रहे कर्मचारी
निगम के कर्मचारी पानी निकासी के कार्य में जुटे रहे। इसके बावजूद पानी इतना अधिक था कि पंप इत्यादि भी ज्यादा काम नहीं कर रहे थे। इस कारण सुबह करीब साढ़े सात बजे बारिश बंद होने के बाद तीन बजे तक अधिकतर जगहों पर पानी जमा रहा। दोपहर बाद जाकर पानी उतरा तब जाकर कर्मचारियों ने थोड़ी राहत की सांस ली।