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Ambala News: महिलाओं और ग्रामीणों को खदेड़ बोर्ड ने लिया 21.86 एकड़ जमीन पर कब्जा

Thu, 21 Aug 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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अंबाला। तोपखाना परेड में रोष प्रदर्शन कर रही महिलाओं सहित स्थानीय निवासियों को खदेड़ते हुए बुधवार दोपहर को कैंटोनमेंट बोर्ड ने 21.86 एकड़ जमीन पर कब्जा ले लिया। भारी पुलिस बल के सहयोग से ड्यूटी मजिस्ट्रेट के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। इस दौरान कुछ लोगों ने पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने तो कुछ ने रेल पटरी को जाम करने की धमकी दी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सात लोगों को हिरासत में ले लिया, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। पिछले लगभग एक माह से जिस पंडाल में स्थानीय लोग धरने पर बैठे थे, उसे भी जेसीबी की मदद से ढहा दिया गया, हालांकि कुछ महिलाओं ने इस कार्रवाई में बाधा बनने की कोशिश की तो पुलिस की महिला टीम को हल्का बल का प्रयोग करना पड़ा।
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सुबह 10.30 बजे पहुंची थी टीम
कैंटोनमेंट बोर्ड की टीम पुलिस के साथ सुबह 10:30 बजे तोपखाना परेड में पहुंच गई थी, लेकिन यहां के निवासियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह अंग्रेजों के समय लगभग 180 वर्षों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं, उनकी तीन पीढि़यां इस कार्य में जुटी रहीं, लेकिन अब उन्हें खदेड़ा जा रहा है और वह भी अपने ही लोगों द्वारा। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन घंटे तक कार्रवाई को स्थगित कर दिया गया।

मांगा अतिरिक्त फोर्स
मामले को तूल पकड़ता देखकर कैंटोनमेंट बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी ने एसपी अंबाला से मंत्रणा की, इसके बाद अंबाला कैंट सहित महेशनगर थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह और पड़ाव थाना प्रभारी धर्मवीर सिंह को डीएसपी सुरेश कुमार की अगुवाई में भारी पुलिस बल के साथ मौके पर भेजा गया। इस दौरान डीएसपी सुरेश कुमार ने स्थानीय लोगों को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने, फिर मौके पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट की तैनाती के निर्देश जारी हुए और कैंट की तहसीलदार प्रियंका कुछ ही समय में मौके पर पहुंच गईं।
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दलील नहीं आई काम
पीड़ित पक्ष की तरफ से वकील ने दलील रखी कि उन्होंने मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की हुई है और इसकी सुनवाई 25 अगस्त को है, इसलिए उन्हें 10 दिन का समय दिया जाए। जब ड्यूटी मैजिस्ट्रेट ने उन्हें कोर्ट से संबंधित कोई आदेश व स्टे के ऑर्डर दिखाने को कहा तो वो उनके पास नहीं थे। वहीं कैंटोनमेंट बोर्ड ने जब ड्यूटी मैजिस्ट्रेट को कोर्ट द्वारा जारी किए गए निलंबन के आदेश दिखा तो ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने कैंटोनमेंट बोर्ड को तारबंदी करने के निर्देश जारी कर दिए।

पहले दिया था समय
24 जुलाई को भी कैंटोनमेंट बोर्ड की टीम जब तारबंदी के लिए तोपखाना परेड में पहुंची थी तो उस समय भी हाईकोर्ट में मामले के लंबित होने को लेकर पीड़ित पक्ष के वकील ने जानकारी दी थी। इस दौरान मोहलत देते हुए मुख्य अधिशासी अधिकारी ने स्थानीय निवासियों से लिखित में लिया था कि जो भी फैसला आएगा वो उन्हें मान्य होगा। लेकिन बुधवार को जब बोर्ड अधिकारी कार्रवाई के लिए पहुंचे तो पीड़ित पक्ष व उनके वकील ने एक बार फिर कोर्ट में मामले की सुनवाई को लेकर समय देने की बात कही। इसे अधिकारी ने खारिज कर दिया।

यह था मामला

दो जुलाई को कैंटोनमेंट बोर्ड ने तोपखाना की 21.86 एकड़ पर कब्जा लिया था। इस जमीन पर बरसों पहले अंग्रेजों ने श्रमिकों को बसाया था और उन्हें खेती के लिए यह जमीन दी थी। इसके बाद कैंटोनमेंट बोर्ड ने अंग्रेजों के कार्यकाल के बाद अपने अधीन ले लिया और इसे 22 स्थानीय निवासियों को छह हजार की लीज पर दे दिया गया। लेकिन धीरे-धीरे लीज की राशि को बढ़ाया गया जोकि 40 हजार प्रति एकड़ तक पहुंच गई जो खेतिहर मजूदरों के लिए चुकाना नामुमकिन हो गया, इसके बाद यह राशि 90 लाख रुपये तक पहुंच गई। इस राशि की प्राप्ति के लिए बोर्ड ने कोर्ट में याचिका दायर की और इसका फैसला भी बोर्ड के पक्ष में आया

तोपखाना परेड में पुलिस की मदद से 21.86 एकड़ जमीन बोर्ड द्वारा तारबंदी करवा दी गई है। इस कार्रवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के वकील ने हाईकोर्ट में याचिका दायर होने का एक बार फिर हवाला दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उनका मामला खारिज कर दिया था। यह पूरी कार्रवाई ड्यूटी मजिस्ट्रेट की निगरानी में की गई है।
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- राहुल आनंद शर्मा, सीईओ, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
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