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सबसे श्रेष्ठ है गुरु-शिष्य का संबंध : अदिति भारती

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शहर के रामबाग ग्राउंड में आयोजित कथा में भजन पर झूमते हुए श्रद्धालु। संस्थान
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अंबाला सिटी। हमारे शास्त्रों में दो प्रकार की विद्या का वर्णन है परा और अपरा विद्या, माता सरस्वती इन दोनों ही विद्याओं की प्रदायिणी है, लेकिन इस संसार की विद्या अपरा विद्या को शास्त्रों में अविद्या और परा विद्या ब्रह्मज्ञान को ही विद्या कहा।
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ब्रह्मज्ञान ही मानव को उसके कर्म बंधन से मुक्त कर श्रेष्ठ पथ पर अग्रसर करता है। कथा व्यास साध्वी अदिति भारती ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से रामबाग ग्राउंड में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को मां के ब्रह्मज्ञान प्रदायिणी महासरस्वती के लीला प्रसंग को श्रवण करवाया।
साध्वी भारती ने बताया कि मां सतगुरु रूप धारण कर अपनी संतानों को आवागमन के चक्र से मुक्त करने के लिए ब्रह्मज्ञान प्रदान करती है और जीवन की उत्कर्ष यात्रा पर उन्हें प्रशस्त करती हैं। स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस, द्रौपदी और भगवान श्री कृष्ण, योगानंद परमहंस और युक्तेश्वर गिरी आदि गुरु-शिष्य जोड़ियों का उदाहरण देते हुए कथा व्यास ने बताया कि इस संसार में गुरु-शिष्य का संबंध ही सर्वश्रेष्ठ संबंध है।
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उन्होंने बताया कि मृत्यु के भय से मुक्ति की युक्ति है ब्रह्मज्ञान आधारित ध्यान-साधना। उन्होंने बताया कि दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज बताते हैं कि ध्यान आंखों को बंद कर बैठना नहीं है अपितु ध्यान तृतीय नेत्र के खुल जाने के बाद प्रारंभ होता है।
विद्या की प्रदायनी मां सरस्वती की कृपा से श्रद्धालुओं को अवगत कराते हुए कथा व्यास ने गुरु चरणों में शरणागति की प्रेरणा दी। इस दिवस की कथा का समापन सरस बसंत पंचमी उत्सव से किया गया। कथा का समापन देवी मां की पावन आरती से किया गया।

शहर के रामबाग ग्राउंड में आयोजित कथा में भजन पर झूमते हुए श्रद्धालु। संस्थान

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